आपातकाल अवैध करार, संकट में जरदारी

जरदारी का संकट इस कारण पैदा हुआ है क्योंकि शुक्रवार के फैसले ने उस नेशनल रीकांसिलिएशन आर्डिनेंस (एनआरओ) को भी समाप्त कर दिया है, जिसे मुशर्रफ ने अक्टूबर 2007 में लागू किया था।
पाक सरकार को 31 दिन का समय
इस अध्यादेश के तहत भ्रष्टाचार, गबन, हत्या और आतंकवाद जैसे आरोपों से घिरे राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आम माफी प्रदान की गई थी। इसी अध्यादेश के कारण जरदारी और उनकी दिवंगत पत्नी बेनजीर भुट्टो को निर्वासन से मुक्ति मिली थी और उनकी स्वदेश वापसी संभव हो पाई थी।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार मुहम्मद चौधरी ने उस समय इस अध्यादेश को रद्द कर दिया था, लेकिन मुशर्रफ द्वारा 3 नवंबर 2007 को आपातकाल की घोषणा किए जाने के बाद चौधरी के उत्तरवर्ती प्रधान न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर ने चौधरी के आदेश को रद्द कर एनआरओ को फरवरी 2008 में फिर से लागू कर दिया था। प्रधान न्यायाधीश चौधरी ने अब सरकार को 31 जुलाई से 90 दिनों का समय दिया है कि या तो एनआरओ को कानून में परिवर्तित किया जाए या इसे रद्द करने की अनुमति दिया जाए।


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