बिहार बाढ़: स्थिति भयावह, सेना पहुंची

Bihar flood
पटना। बिहार में बागमती नदी का तटबंध टूट जाने से बाढ़ की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। इससे निपटने के लिए सरकार ने भारतीय सेना और बीएसएफ के जवानों को बचाव कार्य के लिए भेज दिया है। जवानों ने बाचर्व कार्य शुरू भी कर दिया है। चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग बंधों और ऊंचे क्षेत्रों में शरण लिए हुए हैं। प्रशासन से लेकर शासन तक राहत कार्य में जुट गया है।

शनिवार को सीतामढ़ी जिले के रूनीसैदपुर प्रखंड के तिलक ताजपुर गांव के पास यह तटबंध टूट गया। देखते ही देखते तेज रफ्तार से निकला पानी गांवों में घुस गया। प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य प्रारंभ कर दिया गया है तथा पानी से घिरे लोगों को बाहर निकालने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में नाव भेजे जा रहे हैं।

मुख्‍यमंत्री का विशेष दल पहुंचा

मुख्यमंत्री नितीश कुमार रविवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। उन्‍होंने शनिवार को ही एक उच्‍चस्‍तरीय जांच दल मौके पर भेजने के निर्देश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री रविवार को दोपहर के बाद सीतामढ़ी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री वहां चलाए जा रहे बचाव एवं राहत कायरें का भी जायजा लेंगे।

आपदा प्रबंधन मंत्री देवेशचंद्र ठाकुर ने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रभावित या गांव छोड़ चुके लोगों के लिए नाव तथा तिरपाल भेजे गए हैं। इनके खाने के लिए भी खाद्य सामग्री की व्यवस्था की जा रही है। बाढ़ से प्रभावित करीब 7,000 लोग तटबंधों पर शरण लिए हुए हैं। उन्होंने कहा कि तटबंध में पानी का बहाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि जहां तटबंध कमजोर हैं वहां निगरानी बढ़ा दी गई है।

नदी में कटाव जारी

खबरों के मुताबिक रूनीसैदपुर के पास टूटे तटबंध में कटाव का सिलसिला जारी है। सीतामढ़ी के जिलाधिकारी विश्वनाथ सिंह के मुताबिक तटबंध के टूटने से करीब 40 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। उन्होंने बताया कि प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य प्रारंभ कर दिया गया है तथा पानी से घिरे लोगों को बाहर निकालने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में नाव भेजे जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री सचिवालय के एक अधिकारी के मुताबिक जांच दल में जल संसाधन मंत्री, आपदा प्रबंधन मंत्री के साथ ही दोनों विभागों के प्रधान सचिव तथा राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के पदाधिकारी को शामिल किया गया है। यह जांच दल आज ही सीतामढ़ी के लिए रवाना हो गया है। प्रभावित गांवों में एनडीआरएफ के एक बटालियन को भी भेजा जा रहा है।

नेपाल की बारिश बनी जंजाल

असल में हर साल बिहार में बाढ़ का सबसे बड़ा कारण नेपाल में होने वाली बारिश होती है। इस साल भी यही हो रहा है। नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण बिहार की प्रमुख बागमती तथा कमला नदियां उफान पर आ गईं। पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे कई अन्‍य क्षेत्रों में भी बाढ़ का खतरा उत्‍पन्‍न हो गया है।

बागमती तथा कमला नदी राज्य में कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि अन्य नदियों में पानी सामान्य है। पटना के बाढ़ नियंत्रण कक्ष में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता वीरेन्द्र प्रसाद ने शनिवार को बताया कि बागमती सीतामढ़ी जिले के सोनाखान में खतरे के निशान से एक मीटर जबकि डूबाधार में खतरे के निशान से 1.32 मीटर ऊपर बह रही है।

कमला बलान नदी झंझारपुर में रेल पुल के पास खतरे के निशान को पार कर गई है तथा यहां वह खतरे के निशान से 1.77 मीटर ऊपर बह रही है। वाल्मीकिनगर स्थित बैराज में गंडक का पानी बढ़ने का सिलसिला जारी है। उन्होंने बताया कि शनिवार को बैराज के नीचे गंडक का जलस्राव 191200 क्यूसेक था। बीरपुर बैराज के अधीक्षण अभियंता एम.एफ.हमीद के अनुसार बैराज के नीचे शनिवार को सुबह कोसी का जलस्राव 145800 क्यूसेक था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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