ताजमहल के पीछे रोपवे पर विवाद

Taj Mahal
आगरा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने ताजमहल के पीछे प्रस्तावित रस्सी मार्ग (रोपवे) परियोजना का यह कहते हुए विरोध किया है कि इसके लिए आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने उसकी या सर्वोच्च न्यायालय की इजाजत नहीं ली है।

एडीए की इस परियोजना के लिए 'उषा ब्रेको' समूह के विशेषज्ञों की ओर से अध्ययन और सर्वेक्षण किए गए। इस परियोजना का लक्ष्य पर्यटन को बढ़ावा देना है।

एडीए के उपाध्यक्ष तनवीर जफर ताजमहल के पीछे दो रस्सीमार्ग बनाने का ऐलान कर चुके हैं। उनकी घोषणा के मुताबिक पहला रस्सीमार्ग ताजमहल से महताब बाग और दूसरा आगरा किले तक बनाया जाएगा। जफर ने इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि कृष्ण महाजन से भी बात की है।

पहल सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लें

महाजन ने कहा, "तनवीर मुझसे मिले थे और मैंने उन्हें बता दिया कि पहले इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट से इजाजत लें और फिर हमसे बात करें। इस पर मेरी ओर से किसी भी तरह की सहमति नहीं बनी। मैं आश्चर्य में हूं कि वह कैसे दावा कर रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय इस परियोना को स्वीकृति दे देगा।"

एडीए के अधिकारी राकेश चौहान कहते हैं, "पर्यटक ताजमहल के पीछे महताब बाग इलाके के पहाड़ों तक जाना चाहते हैं। अगर हमारी यह परियजना पूरी हो जाती है तो पहाड़ों पर जाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।"

उधर, पुरातत्व अधीक्षक ए. आर. सिद्दीकी ने आईएएनएस को बताया, "इस बात को लेकर हम बहुत स्पष्ट कह देना चाहते हैं कि ताजमहल के आसपास किसी परियोजना को मंजूरी नहीं दी जाएगी।" उन्होंने कहा, "एडीए की ओर से अब तक कोई इजाजत या अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया है। हालांकि एडीए के उपाध्यक्ष ने दावा किया कि उनकी परियोजनाओं के समझौते में एएसआई के महानिदेशक की सहमति है।'

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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