श्रीलंका में बारूदी सुरंगों को हटांएगी भारतीय कंपनियां
नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। श्रीलंका में तमिल चीतों की पराजय के बाद जमीन में दबी बारूदी सुरंगों को हटाने के काम में लगे भारतीयों के साथ शामिल होने के लिए भारतीय सेना के अवकाश प्राप्त 80 अन्य सैनिक रवाना हुए हैं।
नया दल वर्ष 2003 से श्रीलंका के उत्तरी वावुनिया और मन्नार जिलों में दोनों पक्षों- सेना और तमिल चीतों- द्वारा दबाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के काम में लगे भारतीय दल का साथ देगा।
नए दल में पुणे स्थित होराइजन समूह ने 50 और गुड़गांव की सर्वत्र टेक्नीकल कंसल्टेंट कंपनी ने 32 पूर्व सैनिकों को भेजा है। सर्वत्र 32 और व्यक्तियों को भी श्रीलंका भेजेगी।
दोनों कंपनियों का नेतृत्व अवकाश प्राप्त सैनिक कर रहे हैं और उन्हें अब तक की अपनी उपलब्धियों पर गर्व है। साथ ही वे युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में लगे श्रीलंका की मदद करने के इच्छुक हैं।
होराइजन के प्रमुख अवकाश प्राप्त मेजर जनरल शशिकांत पित्रे ने श्रीलंका में बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने का हवाला देते हुए पुणे से आईएएनएस को टेलीफोन से बताया,"यह बहुत बड़ा अवसर है।"
सर्वत्र के निदेशक (संचालन) अवकाश प्राप्त मेजर जनरल प्रेम के.पुरी ने कहा,"हमें खुशी है कि हम श्रीलंका के पुनर्निर्माण में योगदान करने में सक्षम हैं।"
पित्रे और पुरी दोनों ने बताया कि श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई और उनके सुरक्षा सलाहकार बासिल राजपक्षे भारतीयों द्वारा बारूदी सुरंगों को हटाने के काम से बेहद प्रसन्न हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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