निरुपमा राव बनीं नई विदेश सचिव

राव ने साउथ ब्लॉक में अपने नये कार्यालय में संवाददाताओं से कहा, "मेरे सामने एक जटिल लेकिन आकर्षक कार्य है।" भारतीय विदेश सेवा में इस सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाली वह दूसरी महिला हैं।
उन्होंने बताया, "तेजी से बदलते दुनिया के हालात में हमारा दायित्व अपनी कूटनीतिक और पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाना है ताकि हम वैश्विक मामलों में ज्यादा महत्वपूर्ण दायित्व निभा सकें। अपनी नई जिम्मेदारियों में इस ओर विशेष ध्यान दूंगी।"
श्रीलंका, चीन में रहीं हैं भारत की राजदूत
साउथ ब्लाक में एक संक्षिप्त समारोह में राव ने कार्यभार संभाला। उनसे पहले चोकिला अय्यर 2001 में इस पद पर आसीन हो चुकी हैं। वह देश की प्रथम विदेश सचिव थीं। राव ने कहा "हमारी विदेश सेवा को दुनिया की बेहतरीन सेवाओं में से एक माना जाता है।" उन्होंने भारतीय राजनयिकों की व्यावसायिकता और समर्पण की सराहना की जिनसे मसलों को एकाग्रता, परिपक्व ता और संतुलित ढंग से सुलझाने की अपेक्षा की जाती है।
क्षेत्रीय चुनौतियों और पड़ोसियों के साथ रिश्तों सहित भारतीय विदेश नीति के हितों का उल्लेख करते हुए राव ने कहा कि आर्थिक कूटनीति और सार्वजनिक कूटनीति जैसे मसलों पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए।
आईएफएस के 1973 बैच में अव्वल स्थान पाने वाली राव वर्ष 2001 में विदेश मंत्रालय की प्रथम महिला प्रवक्ता बनीं। उसके बाद वह श्रीलंका और चीन में भारत की राजदूत रहीं और नई दिल्ली लौट आईं। अपने 36 साल के करियर में वह पेरू में भारतीय राजदूत और रूस में दूतावास की उपप्रमुख रही। विदेश सचिव के रूप में राव का कार्यकाल दिसंबर 2010 में उनके सेवानिवृत्त होने के साथ ही समाप्त हो जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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