निजी विमानन कंपनियों की सरकार को धमकी

भारत की कई निजी विमानन कंपनियों ने शुक्रवार को सरकार की ओर से कथित उदासीनता के प्रति विरोध व्यक्त करते हुए अगले महीने 18 अगस्त को अपनी सभी सेवाएं रद्द करने की घोषणा की है.
विमानन कंपनियों ने कहा है कि 17 अगस्त की मध्यरात्रि से 18 अगस्त तक उनकी सभी घरेलू सेवाएं रद्द रहेंगी और अगर सरकार फिर भी उनकी ओर ध्यान नहीं देती है तो वे अनिश्चितकालीन समय के लिए सेवाएं रोकने का फ़ैसला भी ले सकते हैं.
निजी विमानन कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से उन्हें बहुत घाटे में उड़ानें जारी रखनी पड़ रही हैं. विमान सेवाएं चालू रखना हर दिन एक घाटे का सौदा साबित हो रहा है. ऐसे में उन्हें विरोध जताने के लिए ऐसा करने पर मजबूर होना पड़ा है.
ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ समय से विमान कंपनियों और केंद्र सरकार के बीच खींचतान का क्रम जारी है. इन कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दिनों में उन्होंने हज़ारों करोड़ का नुकसान हुआ है और इस स्थिति में वे केंद्र सरकार की ओर राहत की आस लिए देख रहे हैं.
पर विमानन कंपनियों की इस मांग को ग़लत ठहराने वाले बताते हैं कि अगर केंद्र सरकार आर्थिक संकट के दौर में कंपनियों को उबारने का ज़िम्मा अपने सिर ले लेगी तो उसके अपने बजट का क्या होगा, और फिर विमान कंपनियों से पहले कई ऐसे क्षेत्र की निजी कंपनियां मौजूद हैं जिन्हें राहत दिए जाने की ज़रूरत है. अगर इन्हें सरकार राहत देती है तो फिर उन्हें क्यों नहीं.
धमकी... पर धमकी न समझें
अब जबकि निजी कंपनियों के मुताबिक उनके लिए व्यवसाय को आगे खींचना बहुत भारी पड़ रहा है, फ़ैसला लिया गया है कि विरोध स्वरूप एक दिन के लिए सेवाएं रद्द रहेंगी.
हालांकि किंगफ़िशर एअरलाइंस के प्रमुख, विजय माल्या ने कहा कि उनकी ओर से ऐसा निर्णय तब लिया गया है जब सरकार लगातार उनकी मांग को दरकिनार करती आ रही है.
उन्होंने कहा, "हम सरकार को किसी तरह की चेतावनी नहीं दे रहे हैं. इसे धमकी न माना जाए पर हमें इतना तो हक़ है ही कि हमारी बात भी सुनी जाए."
उधर जेट एअरवेज़ के मालिक नरेश गोयल ने कहा, "हम सभी बद से बदतर हालत में हैं. चाहे वे निजी कंपनियां हों और चाहे सरकारी. हमें सरकार से राहत की उम्मीद है वरना कंपनियां खत्म हो जाएंगीं."
फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन एअरलाइंस के सचिव अनिल बैजल ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हाल के दिनों में विमान ईधन की क़ीमतों, एअरपोर्ट आपरेटिंग चार्जों की बढ़ोत्तरी, यात्रियों की और पर्यटकों की तादाद में गिरावट के चलते कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. सरकार से लगातार कहा गया है पर सरकार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
हालांकि एअर इंडिया ने फ़ेडरेशन की ओर से बुलाई गई इस प्रेसवार्ता में हिस्सा नहीं लिया. सरकार जब अपने सरकारी विमानन उपक्रम को बचाने के लिए राहत पैकेज पर विचार कर रही है, उसी वक़्त निजी कंपनियां अपने लिए राहत की मांग कर रही हैं.


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