'शिक्षा का अधिकार' विधेयक से भारत ज्ञान का केंद्र बनेगा : सिब्बल (लीड-1)

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि इस विधेयक का बड़ा लक्ष्य देश को शिक्षा के एक केंद्र के रूप में विकसित करना है।

विधेयक पेश करते हुए सिब्बल ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के लिए यह एक राष्ट्रीय महत्व की बात है। उन्होंने कहा, "यह विधेयक केवल विद्यालय में बच्चों के दाखिले के बारे में नहीं है, बल्कि यह विधेयक शिक्षा की गुणवत्ता, भौतिक अधोसंरचना, शिक्षक-छात्र औसत और शिक्षकों की योग्यता के बारे में भी बात करता है।"

सिब्बल ने कहा, "इस विधेयक के साथ देश का भविष्य जुड़ा हुआ है। यह बौद्धिक संपदा और रचनात्मकता बौद्धिक संपत्तियों का सृजन करेगा।"

सिब्बल ने कहा, "हम अगले 15-20 वर्षो के भीतर देश को ज्ञान के एक केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह विधेयक इस दिशा में पहला कदम है।"

शिक्षा की गुणवत्ता के बारे में बात करते हुए सिब्बल ने कहा कि शिक्षकों की गुणवत्ता की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी। यदि किसी शिक्षक में पर्याप्त गुणवत्ता नहीं पाई गई तो उसे पांच वर्षो के भीतर उपयुक्त गुणवत्ता हासिल करने का समय दिया जाएगा। इसमें विफल होने पर उसकी नौकरी चली जाएगी।

यदि किसी स्कूल के पास उपयुक्त अधोसंरचना नहीं है तो उसे तीन वर्षो के भीतर अधोसंरचना विकसित करने का समय दिया जाएगा। यदि वह ऐसा नहीं कर पाया तो उसकी मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।

सिब्बल ने कहा, "बच्चा शिक्षा पाने का हकदार है। अब हर बच्चे का यह संवैधानिक अधिकार है। यह राज्य सरकारों की और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि बच्चों को शिक्षा मुहैया कराए। जब तक केंद्र व राज्य सरकारें कदम से कदम मिला कर साथ नहीं चलेंगी तब तक इस सपने को पूरा भी नहीं किया जा सकता।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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