दो सीटों से चुनाव लड़ने पर रोक!

चाहे केंद्र के चुनाव हों या राज्यों के। दोनों में ही जब कोई प्रत्याशी दो संसदीय सीटों से चुनाव लड़ता है, तो दोनों जगह से जीतने की दशा में उसे एक सीट छोड़नी पड़ती है। सीट खाली होने पर वहां उपचुनाव कराने पड़ते हैं। खास बात यह है कि उपचुनाव में भी जिला प्रशासन का उतना ही वक्त लगता है, जितना कि मुख्य चुनावों में।
महंगा पड़ता है उपचुनाव
यही नहीं ऐसी दशा में धन भी दुगना खर्च होता है। इसके अलावा कानून व्यवस्था के चरमराने की आशंका तबतक बनी रहती है, जबतक चुनाव निपट नहीं जाते। यानी चुनाव के दौरान अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात करना पड़ता है। अधिकारियों के मुताबिक इन सभी बातों से छुटकारा पाने के लिए चुनाव आयोग अब दो सीटों से चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का मन बना चुकी है।
रोक लगाने से पहले आयोग को जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 में संशोधन करना पड़ेगा, जिस पर विचार शुरू हो चुका है। असल में चुनाव आयोग ने 2004 में ही यह प्रस्ताव रखा था, लेकिन आम राय नहीं बन पाने के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।


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