मनमोहन सिंह ने वाजपेयी के राजनीतिक साहस को सराहा
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर लोकसभा में बहस के दौरान अपने जवाब में मनमोहन सिंह ने वाजपेयी का नाम लिया और कहा कि किसी राजनेता को वाजपेयी जैसा साहसी निर्णय लेना चाहिए जो कि इतिहास को बदल दे।
पिछले एक दशक के भारत-पाकिस्तान संबंधों पर नजर डालते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध और 2001 में संसद पर हुए हमले के बावजूद वाजपेयी द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के प्रति दृढ़ थे।
सिंह ने कहा, "वाजपेयी को बड़ा श्रेय इस बात का है कि वह विचलित नहीं हुए और किसी राजनेता को विचलित होना भी नहीं चाहिए। वर्ष 2004 में वह इस्लामाबाद गए। वहां एक संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसने एक सहयोगात्मक संबंध की दृष्टि तैयार की।"
सिंह ने आगे कहा, "मैं इस सदन को याद दिलाना चाहता हूं कि तत्कालीन विपक्ष ने वाजपेयी के इन साहसी कदमों का समर्थन किया था।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं भी वाजपेयी की दृष्टि के साथ खुद को साझा करता हूं और मैंने पाकिस्तान के साथ निपटने में उनकी हताशा को भी महसूस किया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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