'साइकिल चाची' ने महिलाओं को सिखाया जीने की कला
राजकुमारी देवी ने न केवल अपने परिवार को स्वावलंबी बनाया है, बल्कि इस प्रखंड के करीब 400 अन्य महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है।
विवाह के बाद वर्ष 1974 में जब राजकुमारी देवी अपने ससुराल पहुंचीं तो मनिकपुर गांव की खाली पड़ी जमीन पर भांग के पौधे उग आते थे। इसे देखकर राजकुमारी को खेती के क्षेत्र में कुछ करने की इच्छा हुई।
राजकुमारी ने आईएएनएस को बताया कि प्रारंभ में उन्होंने महिलाओं को एकजुट करना प्रारंभ किया। इसके लिए उन्होंने साइकिल दौरा कर चकला, मनिकपुर तथा सरैया ग्राम पंचायत की महिलाओं को एकत्र किया, कृषि के क्षेत्र में कुछ करने का उन्हें विश्वास दिलाया। शुरू में तो समाज ने राजकुमारी को काफी ताने दिए। परंतु इस ताने से वह और मजबूत हो गईं।
वे बताती हैं कि चकला, मनिकपुर तथा सरैया गांव की 374 महिलाएं खेती तथा गौ-पालन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह के तहत इन महिलाओं का समूह बना दिया गया है। आज ये महिलाएं ओल, केला तथा पपीता की खेती कर रही हैं या फिर गौ-पालन कर रही हैं।
राजकुमारी बताती हैं कि उनके ससुराल में प्रारंभ में तंबाकू की खेती होती थी, जिसे वह बंद करवा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं। राजकुमारी आज भी साइकिल से गांव-गांव दौरा कर महिलाओं को प्रेरित करती हैं। इस कारण वे 'साइकिल चाची' के नाम से प्रसिद्ध हो गई हैं।
इधर, समूह से जुड़ीं सरोजनी बताती हैं कि साइकिल चाची ने हम लोगों को जीने की कला बता दी है। उन्होंने बताया कि वह ओल तथा आम पैदा कर उसका आचार बनाकर बेच रही हैं। कई महिलाओं ने इसके लिए बाकायदा प्रशिक्षण लिया और बाद में गांव की महिलाओं को इसके गुर सिखाए, जिससे घर बैठी महिलाओं को रोजगार मिल गया है।
राजकुमारी को हालांकि इस बात का अफसोस है कि सरकार ने उनके महिला समूहों के लिए बहुत कुछ नहीं किया। उनका कहना है कि अगर सरकार इन महिलाओं को आधुनिक मशीनें उपलब्ध करा दे तो महिलाएं और आगे बढ़ सकती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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