पाकिस्तान पर संप्रग को राजग से नसीहत लेने की जरूरत नहीं : प्रधानमंत्री (लीड-2)
मिस्र में जारी भारत-पाकिस्तान संयुक्त बयान पर लोकसभा में बुधवार को बहस के बाद जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मुंबई आतंकी हमले पर पाकिस्तान की ओर से सौंपे गए दस्तावेज में जांच के बाद उसने पहली बार औपचारिक तौर पर स्वीकार किया है कि आतंकी हमले में उसके नागरिक लिप्त हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सौंपे गए 34 पृष्ठ के दस्तावेज में पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी द्वारा की गई जांच की रूपरेखा, उसके विवरण, घटनाक्रम का ब्योरा, प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रतिलिपि, तस्वीरें, इस्तेमाल किए गए संचार उपकरण की जानकारी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि दस्तावेज में जब्त किए गए साहित्य, अन्य सामान और खुफिया तौर-तरीके की जानकारी दी गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दस्तावेज यह स्थापित करता है कि जांच में यह साबित हुआ है कि हमले के पीछे बिना संदेह लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है और उसी ने हमले के लिए धन मुहैया कराया। "हमें बताया गया है कि जांच पूरी होने वाली है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसा पहली बार हुआ है कि पाकिस्तान ने किसी आतंकी हमले की जांच के बाद औपचारिक तौर पर हमें जानकारी दी है। उन्होंने पहली बार स्वीकार किया है कि उसके देश में स्थित आतंकवादी संगठन में शामिल उसके नागरिकों ने भारत में जघन्य हमले को अंजाम दिया।"
उन्होंने कहा कि उनके फ्रांस और मिस्र दौरे पर जाने से पहले सौंपे गए दस्तावेज में पाकिस्तान ने इस बात को स्वीकार किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वास्तविकता यह है कि राजग सरकार पाकिस्तान से जो अपेक्षा कर रही थी, यह कहीं उससे अधिक है।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को राजग से कोई नसीहत लेने की जरूरत नहीं है।
प्रधानमंत्री ने मिस्र के शर्म अल-शेख में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी के साथ भेंट के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि विदेश नीति के मामले में आम सहमति की परंपरा को उनकी सरकार ने खंडित नहीं किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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