जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा में तीसरे दिन भी हंगामा (लीड-3)
सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ सेक्स कांड में कथित रूप से शामिल होने का आरोप लगाने वाले पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी (पीडीपी) के नेता मुजफ्फर हुसैन बेग के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने का फैसला किया।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में मुख्यमंत्री को क्लीन चिट दे दी है।
कानून मंत्री अली मुहम्मद सागर ने विधानसभा अध्यक्ष को बताया कि पीडीपी सदस्य ने मुख्यमंत्री के खिलाफ गलत आरोप लगाया है, इसलिए नेकां उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश कर रही है।
विधानसभा अध्यक्ष ने विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और कहा कि उसे आने वाले दिनों में सदन के पटल पर रखा जाएगा।
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष मुहम्मद अकबर लोन ने सीबीआई द्वारा विधानसभा सचिवालय को भेजे एक पत्र को सदन में पढ़ा। पत्र में उमर अब्दुल्ला को क्लीन चिट दी गई है।
महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में पीडीपी सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए सीबीआई के पत्र की प्रतियां फाड़ डालीं और मामले की न्यायिक जांच की मांग की। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सीबीआई मुख्यमंत्री को बचाने का प्रयास कर रही है।
पीडीपी ने कहा कि वर्ष 2007 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बशीर अहमद किरमानी द्वारा इस मामले में दिए गए निर्णय का हिस्सा रही 'शर्मनाक सूची' में उमर का नाम शामिल था।
इससे पहले विधानसभा की कार्यवाही आरंभ होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने कहा कि विधानसभा का सत्र जारी नहीं रखा जा सकता क्योंकि मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद राज्य में कोई सरकार नहीं है।
सदन में जहां आज गठबंधन सरकार के सभी मंत्री मौजूद थे, वहीं उमर अब्दुल्ला सदन में नहीं आए।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को पीडीपी नेता बेग ने एक सूची पेश की थी और कहा था कि यह सीबीआई जांच के बाद सेक्स स्कैंडल के आरोपियों की सूची है। उनके अनुसार सूची में 102वें नंबर पर उमर अब्दुल्ला का नाम है।
कश्मीर में सेक्स स्कैंडल वर्ष 2006 में सामने आया था। इसमें राज्य के वरिष्ठ नेताओं,अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने के बाद जनता के आक्रोश को देखते हुए राज्य उच्च न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए सीबीआई को मामले की जांच का आदेश दिया था।
सीबीआई ने जी.एम.मीर, रमन मट्टू और इकबाल खांडी को गिरफ्तार किया था। मीर और मट्टू कांग्रेस-पीडीपी संयुक्त सरकार में मंत्री थे जबकि खांडी तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद के पूर्व प्रधान सचिव थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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