एडमिरल गोर्शकोव के नए सौदे को अंतिम रूप नहीं : एंटनी
एंटनी ने प्रश्नकाल के दौरान राज्यसभा में कहा, "रूस ने अपनी मांग में काफी वृद्धि की है। इस संबंध में सौदेबाजी अभी पूरी नहीं हुई है। हम कैग (महालेखा नियंत्रक परीक्षक) की रिपोर्ट सहित हर चीज (सौदे के खिलाफ कही गई बातों) की जांच करेंगे।"
कैग की रिपोर्ट पर एक पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए एंटनी ने यह बात कही।
उल्लेखनीय है कि कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सेकेंड हैंड पोत नए पोत की तुलना में 60 प्रतिशत महंगा है और इसकी आपूर्ति में और अधिक विलंब हो सकता है।
वास्तविक सौदे पर वर्ष 2004 में हस्ताक्षर हुए थे। इसके अनुसार वर्ष 1995 में आग से क्षतिग्रस्त पोत की मरम्मत के लिए भारत 1.5 अरब डॉलर देगा। 45,000 टन वजनी पोत की मरम्मत और इस पर मिग-29 लड़ाकू विमान और कामोव पनडुब्बी रोधी हेलीकाप्टर की तैनाती पर अब तक 94.8 करोड़ डॉलर खर्च किए जा चुके हैं।
वर्ष 2007 से ही रूस मरम्मत की बढ़ी हुई लागत के लिए अधिक धन की मांग करता आ रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में कहा गया है कि रूस 22 से 29 लाख डॉलर अधिक देने के लिए कह रहा है।
एंटनी और रूसी रक्षा मंत्री के स्तर पर हुई सौदेबाजी में भी अभी तक मामले को सुलझाया नहीं जा सका है।
एंटनी ने कहा कि भारतीय नौसेना वर्ष 1994 से विमानवाहक पोत की तलाश कर रही थी लेकिन कोई भी देश उसे पोत बेचने की स्थिति में नहीं था। रूस ने गोर्शकोव को भारत को उपहार में देने का फैसला किया लेकिन उसकी मरम्मत का खर्च भारत को उठाना था। इसके बाद वर्ष 2004 में समझौते पर दस्तखत हुए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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