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'लश्कर की जड़ें काफ़ी गहरी हैं'

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Lashkar

जानेमाने अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि पाकिस्तान भले ही अब मुंबई हमलों में लश्करे तैयबा का हाथ होने की बात कह रहा है लेकिन इस चरमपंथी संगठन की जड़ें पाकिस्तान में इतनी गहरी हैं कि उन्हें उखाड़ना असंभव सा नज़र आता है.अपनी एक ख़ास रिपोर्ट में अख़बार ने ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के एक उच्च अधिकारी के हवाले से कहा है कि कम से कम डेढ़ लाख लोग इस संगठन के सदस्य हैं और इसकी जिहादी और भारत विरोधी सोच की पैठ पूरे पाकिस्तान में गहराई तक है.

बिना नाम लिए हुए इस सूत्र के हवाले से कहा गया है कि ये संगठन एक दूसरे जिहादी संगठन, जैश ए मोहम्मद, के साथ मिलकर "पाकिस्तान में आग लगा सकता है". पाकिस्तानी फ़ौज और हुकूमत का दावा करती रही है कि अमरीका में ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद से उसने लश्कर से अपने संबंध तोड़ लिए थे लेकिन अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि वो अभी भी पाकिस्तान सरकार और इस संगठन के रिश्तों को समझने की कोशिश कर रहा है.

न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा है कि जिस तरह की रिश्तों की संभावनाएं हैं उनमें से कोई भी भारत और पाकिस्तान के आपसी ताल्लुकात के लिए अच्छी ख़बर नहीं है. इन संभावनाओं में एक है कि लश्कर अभी भी पाकिस्तानी सरकार के इशारों पर काम कर रहा है, दूसरी संभावना है कि ये संगठन और दूसरे जिहादी संगठनों ने अपने को पाकिस्तान के हितों से जोड़ लिया है और उसे एक परोक्ष युद्द में इस्तेमाल किया जा सकता है और तीसरी संभावना है कि वो सरकारी तंत्र से रिश्ते तोड़ चुके हैं और स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हों.

अमरीकी विश्लेषकों का कहना है कि अगर सरकारी तंत्र से इनके रिश्ते टूट चुके हैं तो ये और भी ख़तरनाक बात है. पाकिस्तानी फ़ौज के प्रमुख जनरल अशफ़ाक कियानी ने ओबामा प्रशासन के साथ हुई बातचीत में कहा है कि वो लश्कर पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

एक अमरीकी अधिकारी के हवाले से अख़बार ने कहा है कि कियानी इसके साथ साथ ये भी कह रहे हैं कि भारत को भी बलोचिस्तान में दखलअंदाज़ी करने से रोकना होगा. संयुक्त राष्ट्र और अमरीका लश्करे तैयबा को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं लेकिन कुछ समय पहले तक इस संगठन को अमरीकी नज़रिए से एक बड़ा ख़तरा नहीं माना जाता था.

लेकिन अब अमरीकी विश्लेषक और ख़ुफ़िया अधिकारी मानते हैं कि लश्कर और अल क़ायदा एक ही सोच के हैं.ओबामा प्रशासन के सलाहकार रह चुके पूर्व सीआईए अधिकारी ब्रूस राइडल का कहना है कि ये दोनों संगठन अब मिलकर काम करते हैं और इनके छिपने के ठिकाने भी एक होते हैं.

कहा जा रहा है कि पाकिस्तान भी अब मुंबई हमलों में सीधा लश्कर का हाथ मान रहा है लेकिन उसकी जड़ों को काटने के लिए वो किस हद तक जाएगा ये अभी स्पष्ट नहीं है.फ़िलहाल इस मामले में पाकिस्तान में पांच लोग गिरफ़्तार हैं और उनपर मुकदमा चलाया जा रहा है लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने अदालत के फ़ैसले के बाद जमात उद दवा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को गिरफ़्तार करने से मना कर दिया है. भारत हाफ़िज़ सईद को मुंबई हमलों का मुख्य मास्टरमाइंड मानता है.

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