मौद्रिक समीक्षा नीति : मुद्रास्फीति पर चिंता, प्रमुख दरें अपरिवर्तित (राउंडअप)

समीक्षा नीति में आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा, "बैंक के सामने तात्कालिक चुनौती पर्याप्त तरलता कायम करने की अल्पकालिक मजबूरियों और मुद्रास्फीति में होने वाली संभावित वृद्धि के बीच संतुलन कायम करना है।"

सुब्बाराव ने कहा कि यही वह कारण है जिससे कि वह बैंक दर, रेपोदर और रिवर्स रेपो दर जैसी महत्वपूर्ण दरों में कोई परिवर्तन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और सांविधिक तरलता अनुपात (सीएलआर) को जस का तस बनाए रखते हुए मुद्रा की आपूर्ति पर पैनी नजर है।

आरबीआई की ओर से जारी एक बयान में सुब्बाराव ने कहा, "जब तक अर्थव्यवस्था में निश्चित तौर सुधार के संकेत नहीं दिखते तब तक रिजर्व बैंक एक समायोजित मौद्रिक नीति को बनाए रखेगा।"

यद्यपि, उन्होंने यह भी कहा कि व्यावसायिक बैंकों के पास ब्याज दरों में कटौती करने की पूरी गुंजाइश है ताकि उद्योगों और लोगों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध हो सके।

इससे पहले 21 अप्रैल को जारी नीति में आरबीआई ने रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती की थी जबकि सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) और नकद आरक्षित अनुपात को क्रमश: 24 और पांच फीसदी पर अपरिवर्तित रखा था।

वर्तमान में रेपो दर 4.75 फीसदी है जबकि रिवर्स रेपो दर 3.25 फीसदी है।

व्यावसायिक बैंक जिस दर पर रिजर्व बैंक से धन उधार लेते हैं उसे रेपो दर और जिस दर पर रिजर्व बैंक के पास धन जमा करते हैं उस दर को रिवर्स रेपो दर कहा जाता है।

रेपो दर में कमी से व्यावसायिक बैंकों के पास ऋण देने के लिए सस्ती दर पर धन उपलब्ध होता है जबकि रिवर्स रेपो दर में कटौती से बैंक के लिए रिजर्व बैंक के पास धन जमा करना फायदेमंद नहीं होता। दोनों ही स्थितियां ऋण बाजार में धन की उपलब्धता बढ़ाने में कारगर होती हैं।

सुब्बाराव ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित वर्तमान महंगाई की दर मोटे तौर पर पिछले वर्ष उच्च आधार कीमत की सांख्यिकीय आंकड़ेबाजी है। उन्होंने कहा कि इसे मांग में कमी के कारण अपस्फीति के रूप में परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है और मानसून की अस्थिरता के कारण इसमें आगे और तेजी आएगी।"

समीक्षा नीति पर अपनी प्रतिक्रिया में अग्रणी औद्योगिक संगठन एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने कहा कि मंगलवार को घोषित नीतियां पूर्वानुमानित थीं।

एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने कहा कि यद्यपि आरबीआई को विदेशी संस्थागत निवेशकों के बांड बाजार में प्रवेश के लिए कदम उठाना चाहिए था।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "घरेलू मांग पर वित्तीय और मौद्रिक कदमों के पड़े असर से आर्थिक विकास की दर सात फीसदी तक पहुंच सकती है।"

आर्थिक शोध कंपनी मूडी की वेबसाइट इकनॉमिक डॉट कॉम ने कहा कि आरबीआई ने अर्थव्यवस्था की विकास में रफ्तार के लौटने तक समायोजित मौद्रिक नीति की बात कही है।

वेबसाइट के अर्थशास्त्री शेरमैन चान ने कहा, "अभी भी वैश्विक वातावरण में एक अस्थिरता है। ऐसे में दरों में कटौती से घरेलू बाजार में तुरंत तेजी नहीं लौटेगी। दरअसल, पूर्व में दरों में की गई कटौती का बाजार पर असर अब दिख रहा है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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