पीडीपी के आरोपों के बाद उमर अब्दुल्ला का इस्तीफा (लीड-3)
जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने मंगलवार को उमर अब्दुल्ला का इस्तीफा मंजूर कर लिया। राज्यपाल ने अगले मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण करने तक उमर से पद पर बने रहने को कहा है। उमर जनवरी 2009 में नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन सरकार का गठन होने पर राज्य के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए थे।
इससे पहले विधानसभा में उमर के इस्तीफा देने की चेतावनी के बाद हंगामा शुरू हो गया। उनकी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के सदस्यों ने उन्हें घेर लिया और वहां से जाने से रोकने की कोशिश करने लगे। लेकिन उमर सदन से बाहर चले गए।
वर्ष 2006 में श्रीनगर में एक नाबालिग लड़की ने राज्य के राजनीतिज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों पर बलात्कार का आरोप लगाया था।
इस पर भड़के जनाक्रोश के बाद जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)को सौंप दिया था। सीबीआई ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था और इस मुकदमे की सुनवाई पंजाब की एक सत्र अदालत में लंबित है।
मंगलवार को यह मुद्दा एकाएक विधानसभा में फिर से गरमा गया। पीडीपी के वरिष्ठ नेता मुजफ्फर हुसैन बेग ने एक सूची सौंपते हुए कहा कि सीबीआई द्वारा तैयार सूची में उमर का नाम 102वें नंबर है।
इसके तत्काल बाद उमर अपने स्थान से उठे और बोले कि ऐसे हालात में वह राज्य के मुख्यमंत्री पद पर नहीं बने रह सकते।
भावुक उमर ने कहा, "आज सदन की कार्यवाही समाप्त होते ही मैं राज्यपाल के पास जाकर अपना इस्तीफा सौंप दूंगा। जब तक मेरा नाम आरोपियों की सूची से नहीं हटता तब तक मैं मुख्यमंत्री के रूप में काम नहीं कर सकता।"
उमर के सदन से बाहर जाते ही उनकी पार्टी के सदस्य भी उन्हें जल्दबाजी नहीं करने और अपना इरादा बदलने के लिए समझाने के वास्ते उनके पीछे चले गए।
उमर आगे की कार्रवाई पर विचार करने के लिए वहां से अपने आवास चले गए। उनके पिता एवं नेकां अध्यक्ष तथा केंद्रीय मंत्री फारुक अब्दुल्ला मंगलवार को श्रीनगर में ही थे और नई दिल्ली लौट रहे थे लेकिन इस संकट की जानकारी मिलते ही वह हवाई अड्डे से लौट आए। सूत्रों ने बताया कि उमर अपने पिता से सलाह करके ही अंतिम फैसला लेंगे।
उधर पीडीपी के वरिष्ठ नेता मुजफ्फर हुसैन बेग ने मंगलवार को वर्ष 2006 के सेक्सकांड में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कथित संलिप्तता की जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता फारुक अब्दुल्ला भी इस कांड में लिप्त हैं।
मंगलवार को विधानसभा में बेग ने उमर पर यह आरोप लगाया था। बाद में संवाददाताओं से बातचीत में बेग ने कहा, "हम जांच कराना चाहते हैं..सीबीआई को पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय पहुंचने दीजिए और उसकी देखरेख में जांच करने दीजिए या फिर सर्वोच्च न्यायालय का कोई सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसकी जांच करे।"
बेग ने माना कि यह सिर्फ आरोप है और उन्होंने कहा कि उन्हें या उनकी पार्टी को इसकी कोई चिंता नहीं है कि उमर इस्तीफा देते हैं या नहीं। यह उन्हें तय करना है कि वे इस्तीफा दें या पद पर बने रहें।
बेग ने कहा कि सीबीआई की ओर से उच्च न्यायालय में दाखिल की गई सूची में पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुला का नाम भी शामिल है। बेग ने कहा, "उमर के पिता का नाम भी इसमें शामिल है।..यह 38 वें नंबर पर है। मैंने सदन में उनका नाम इसलिए नहीं लिया क्योंकि वह उसके सदस्य नहीं हैं।"
जम्मू एवं कश्मीर में गठबंधन सरकार में शामिल घटक दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज ने नई दिल्ली में संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, "उमर को ज्यादा भावुकता से काम नहीं लेना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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