मुंबई में 2003 के विस्फोटों के लिए पति-पत्नी और सहायक दोषी करार (लीड-1)

आतंकवाद निरोधक कानून (पोटा) के तहत विशेष अदालत के न्यायाधीश एम.के.पुराणिक ने तीन मुख्य आरोपियों मुहम्मद हनीफ सैयद (42 वर्ष), फहमिदा मुहम्मद सैयद (36 वर्ष) और उनके नजदीकी सहयोगी अशरत शफीक अंसारी (32 वर्ष) को दोषी पाया।

अभियोजन पक्ष के वकील उज्‍जवल निकम ने संवाददाताओं से कहा, "विशेष न्यायाधीश एम. आर. पुराणिक ने दोषियों को सजा सुनाने की तारीख चार अगस्त तय की है।"

उन्होंने कहा, "हम इस मामले में कठोरतम सजा चाहते हैं। सभी दोषी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य हैं। इन तीनों को भारतीय दंड प्रक्रिया संहित की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया गया है, जिसके तहत आजीवन कारावास या मृत्यु दंड की सजा का प्रावधान है।"

चौथा आरोपी जाहिद यूसुफ पाटनी जो विस्फोट का षडयंत्र रचने वाले गुजरात रिवेंज फोर्स नामक लश्कर ए तैयबा के माड्यूल का प्रमुख था, मामले का सरकारी गवाह बन गया।

बचाव पक्ष के वकील एस.कुंजुरामन ने कहा कि बम विस्फोट की घटनाओं में शामिल सैयद की कम उम्र की बेटी पर पोटा के तहत आरोप नहीं लगाए गए थे और उसे कुछ वर्ष पहले ही बरी किया जा चुका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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