भारत को मिलने वाली रूसी पनडुब्बी के परीक्षण का आरंभिक दौर पूरा
इससे पहले के परीक्षण के दौरान पनडुब्बी में गैस रिसाव से हुई दुर्घटना में 20 व्यक्तियों की मौत हुई थी।
भारत को यह पनडुब्बी वर्ष 2009 के अंत में मिलने वाली थी लेकिन दुर्घटना के कारण इसके परीक्षण जुलाई 2010 में पूरे होंगे।
शिपयार्ड के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रिया नोवोस्ती को बताया कि तय कार्यक्रम के अनुसार समुद्री परीक्षण का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
अधिकारी ने बताया कि पनडुब्बी अब परीक्षण के दूसरे दौर के लिए तैयार है।
उल्लेखनीय है कि आठ नवंबर 2008 को परीक्षण के लिए जापान सागर में जाने के बाद पनडुब्बी की अग्निशमन प्रणाली में आई खराबी के बाद हुए गैस रिसाव में चालक दल के तीन और शिपयार्ड के 17 कर्मचारियों की मौत हुई थी। उस वक्त पनडुब्बी में कुल 208 लोग सवार थे।
उसके बाद मरम्मत कार्य में 6 करोड़ डॉलर की लागत आई।
भारत ने 12,000 टन भार की अकुला 2 श्रेणी की के-152 नेरपा पनडुब्बी को 10 वर्ष के लिए पट्टे पर लेने हेतु 65 करोड़ डॉलर का भुगतान किया है।
अकुला 2 को रूसी परमाणु पनडुब्बियों में सबसे खतरनाक माना जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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