मप्र में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खिंचने के आसार (लीड-1)
उधर हड़ताली डॉक्टर किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। दोनों के रुख में बदलाव न आने से हड़ताल के और लंबा खिंचने के आसार बन गए हैं।
मध्य प्रदेश के जूनियर डाक्टर की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही। जूनियर डाक्टर स्टाइपंड बढ़ाने सहित अन्य मांगों के पूरा होने पर ही काम पर लौटने की शर्त पर अड़े हैं तो सरकार भी हड़ताल खत्म होने से पहले कोई निर्णय लेने को तैयार नहीं है। दोनों पक्षों की इसी जिद के कारण शुक्रवार को समझौता वार्ता विफल रही थी।
ग्वालियर में स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा ने रविवार को एक बार फिर कहा कि सरकार हड़ताल खत्म होने के बाद ही मांगों पर विचार करेगी। निष्कासन के बाद जूनियर डाक्टर छात्र नहीं रहे है, लिहाजा उन्हें छात्रावास खाली करना होगा।
दूसरी ओर हड़ताली डाक्टरों ने इन्दौर में गंदी बस्तियों में दवाई बांटी, ग्वालियर में सांपों को दूध पिलाया और पांच हजार पोस्ट कार्ड लिखे।
जूनियर डाक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा वास्केल ने आईएएनएस को बताया कि सरकार चाहे जितना सख्त रुख अपनाए मगर उनका आन्दोलन खत्म नहीं होने वाला।
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण प्रदेश के पांच चिकित्सा महाविद्यालयों भोपाल, इन्दौर, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं।
जूडा के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कांत प्रजापति का कहना है कि उन्होंने बातचीत के सारे विकल्प खुले रखे हैं मगर प्रदेश सरकार का रुख सकारात्मक नहीं है। सरकार को जूडा की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्दी निर्णय लेना चाहिए।
जूडा की हड़ताल से सबसे बुरा हाल उन गरीब मरीजों तथा उनके परिवारों का है जो पूरी तरह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications