कारगिल के शहीदों को द्रास में श्रद्धांजलि
अधिकारियों, जवानों के साथ ही कई शहीदों के परिवार के सदस्यों ने भी सुबह युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।
रणनीतिक महत्व के श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर कब्जे के इरादे से पाकिस्तानी सेना के सहयोग से भारी हथियारों से लैस घुसपैठियों के नियंत्रण रेखा पार करके कारगिल, द्रास, बटालिक और टुरटोक सेक्टरों में घुस आए थे। घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए हुए संघर्ष में 500 से अधिक भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।
कारगिल युद्ध के दौरान रिपोर्टिग करने वाले और रविवार को समारोह में मौजूद पत्रकार संकरशान ठाकुर ने बताया कि घुसपैठिए राजमार्ग से 300 मीटर दूर तक आ गए थे।
वर्ष 1999 में ब्रिगेडियर और द्रास सेक्टर से घुसपैठियों को पीछे धकेलने वाली माउंटेन ब्रिगेड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाश प्राप्त) अमरनाथ औल ने कहा, "यह ऐसा अनुभव है जिसे कोई सैनिक कभी नहीं भूल सकता। मैं अपने जवानों की अथक प्रतिबद्धता को सलाम करता हूं, जो सभी कठिनाइयों से लड़े और अपने देश की रक्षा के लिए आवश्यकता हुई तो जान देने से भी नहीं हिचके।"
सेना से पिछले महीने अवकाश ग्रहण करने वाले औल ने माउंटेन ब्रिगेड के सभी बहादुर जवानों को याद किया, जो द्रास अभियान में शरीक हुए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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