बाघों की सुरक्षा से जुड़े रेडियो कॉ¶रिंग को बंद नहीं किया जाएगा : रमेश
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री शनिवार को सरिस्का में टाइगर रिजर्व क्षेत्र के निदेशकों के दो दिवसीय अखिल भारतीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत राय के बजाय सरकार रेडियो कॉलरिंग के वैज्ञानिक दृष्टिकोण का पालन करेगी जो बाघ की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रेडियो कॉलरिंग पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाने की तैयारी सरकार की नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश में 13 संवेदनशील टाइगर क्षेत्रों में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया जाएगा। इस फोर्स में स्थानीय वन गुर्जरों व पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में संशोधन की बात की जा रही है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की खामियों के कारण वन्य जीव शिकारी व अपराधियों को सजा नहीं मिल पाती है।
उन्होंने कहा कि देश में 37 टाइगर प्रोजेक्ट हैं तथा उन्हें कैटेगरी के हिसाब से विभाजित कर रखा हैं। इनमें अच्छे प्रोजेक्ट 12 है। 9 प्रोजेक्ट संतोषजनक हैं व 16 प्रोजेक्टों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण निधि (कैम्पा) का पैसा अब राज्य सरकार खर्च कर सकेगी। कैम्पा के तहत 11 हजार करोड़ रुपये जमा हैं जिनका अब तक उपयोग नहीं हो पा रहा था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान को 400 करोड़ रुपये मिलेंगे जिसमें प्रथम फेज में 40 करोड़ रुपये दिये जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस पैसे का पारदर्शिता के साथ उपयोग करें।
उन्होंने कहा कि चार साल के अन्दर टाइगर गणना अनिवार्य रुप से करवाई जाएगी जबकि मॉडल के रुप में चुनिंदा अभ्यारण्य क्षेत्रों में दो वर्ष में भी गणना करवाई जा सकेगी । इस संबंध में शनिवार को राज्यों के प्रतिनिधियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि टाइगर गणना में रिसर्च वैज्ञानिक, स्वयंसेवी संस्थान, फील्ड में कार्य कर रहे लोगों व वन्य जीव विशेषज्ञों को शािमल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि टाइगर अभयारण्य क्षेत्र के कोर एरिया में करीब 80 हजार परिवारों के पुनर्वास की जरूरत है। सरिस्का में ही करीब एक हजार परिवार हैं, जिन्हें अलग बसाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य क्षेत्रों से परिवारों के पुनर्वास के लिए धन की कोई कमी नहीं है। एक परिवार के पुनर्वास के लिए केन्द्र सरकार की ओर से 10 लाख रुपये दिए जा रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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