बलूचिस्तान से भारत का कोई वास्ता नहीं : चिदंबरम (लीड-1)
समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन को एक साक्षात्कार में चिदंबरम ने कहा,"पाकिस्तान की आंतरिक समस्याओं में हमारी कोई भूमिका नहीं है। हम क्यों उसमें शामिल होंगे।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बीच मिस्र के शर्म अल-शेख में वार्ता के बाद 16 जुलाई को जारी संयुक्त बयान में 'बलूचिस्तान खतरे' को शामिल करने की अनुमति देने के भारत के विवादास्पद कदम के संबंध में एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने यह बात कही।
यद्यपि पाकिस्तान लंबे समय से बलूचिस्तान की अशांति को भड़काने का आरोप भारत पर लगाता रहा है लेकिन यह पहली बार है, जब इस मसले को दोनों देशों के संयुक्त बयान में स्थान दिया गया है।
उधर, पंजाब के होशियारपुर स्थित खरकां के निकट सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के शिविर में 180 महिला प्रशिक्षुओं की पासिंग आउट परेड की सलामी लेने पहुंचे चिदंबरम ने परवेज मुशर्रफ के कारगिल संबंधी बयान पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने वर्ष 1999 के कारगिल अभियान को अपने देश के लिए बड़ी सफलता बताते हुए कहा था कि इसी की वजह से उनका देश भारत को कश्मीर मसले पर बातचीत शुरू करने पर राजी कर सका।
संवाददाताओं द्वारा मुशर्रफ की उक्त टिप्पणी के बारे में पूछने पर चिदंबरम ने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं कहना है।
वर्ष 1999 में सेना प्रमुख रहे मुशर्रफ ने एक साक्षात्कार में कहा कि कारगिल अभियान एक बड़ी कामयाबी था क्योंकि उसने भारत को कश्मीर के मसले पर बातचीत करने के लिए विवश कर दिया।
मुशर्रफ ने 'डेविल्स एडवोकेट' कार्यक्रम के दौरान साक्षात्कारकर्ता करन थापर के सवाल के जवाब में कहा, "हां, यह बड़ी कामयाबी थी क्योंकि इसका भारतीय पक्ष के रवैये पर भी खासा असर पड़ा। नहीं तो हम कश्मीर विवाद पर चर्चा कैसे शुरू करते?"
पाकिस्तानी मीडिया की खबरों के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने भारत सरकार को एक दस्तावेज सौंपकर पाकिस्तानी सूबे में अशांति पैदा करने का आरोप लगाया है। इस दस्तावेज में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हमले के पीछे भी भारत का हाथ होने का आरोप लगाया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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