मंत्रालय ने सूचना आयोग का आदेश 10 महीनों तक नजरअंदाज किया
अगस्त 2008 में पारित एक आदेश में सीआईसी ने अपनी फाइलों और रिकॉर्ड को सही तरीके से व्यवस्थित न कर पाने के लिए एनसीडब्ल्यू को आड़े हाथों लिया था।
सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के. बत्रा द्वारा निठारी हत्याकांड के संबंध में सूचना हासिल करने के लिए दायर आरटीआई आवेदनों पर सीआईसी ने अपने आदेश में लिखा था, "दलीलों को सुनने और फाइलों के परीक्षण के बाद हमें गहरे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि सेवानिवृत्त कमोडोर बत्रा जिस एक महत्वपूर्ण मामले को एनसीडब्ल्यू के सामने लाए थे, उससे निपटने में एनसीडब्ल्यू में ठोस कार्य प्रणाली का अभाव देखने को मिला है।"
उसके बाद सूचना आयोग ने डब्ल्यूसीडी मंत्रालय को एनसीडब्ल्यू की कार्यप्रणाली में सुधार का निर्देश दिया था। निर्देश में आंकड़ों को व्यवस्थित करने के लिए आरटीआई कानून 2005 के अनुसार एनसीडब्ल्यू के लिए एक नियमित प्रशासनिक ढांचे को स्थापित करने के लिए कहा गया था। मंत्रालय को इस काम के लिए 30 दिन का समय दिया गया था और उसके बाद उसके बारे में सीआईसी को सूचित करना था।
बत्रा ने आईएएनएस को बताया, "यह जानने के लिए कि सीआईसी के आदेश को कितना लागू किया गया, मैंने 12 जून को डब्ल्यूसीडी मंत्रालय में एक आरटीआई आवेदन दायर किया। मुझे वहां से जो विवरण मिला उसके अनुसार लगभग 10 महीनों के दौरान उस आदेश के संदर्भ में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।" बत्रा ने कहा कि सीआईसी ने भी निर्देश जारी करने के बाद मंत्रालय से दोबारा कोई पूछताछ नहीं की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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