केरल ने भारत-आसियान व्यापार समझौते का विरोध किया

कृषि मंत्री मुल्लाकारा रत्नाकरन ने संवाददाताओं को बताया कि इस संबंध में निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री वी.एस.अच्युतानंदन के सरकारी निवास पर मंत्रिमंडल की एक आपात बैठक हुई।

रत्नाकरन ने कहा कि इससे पूरे प्रदेश खासकर इडुक्की और वायनाद जिले की कृषि प्रभावित होगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के आसियान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर के लिए मंजूरी देने के बाद राज्य सरकार का यह विरोध सामने आया है।

रत्नाकरन ने कहा कि यह काफी आश्चर्यजनक है कि किसानों के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने एफटीए को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

एफटीए में करीब 4,000 वस्तुओं पर पर से आयात शुल्क हटाया जाएगा।

समझौते पर नवंबर में आसियान की आगामी बैठक में हस्ताक्षर होने वाले हैं और इसे एक जनवरी 2010 से लागू किया जाना है।

यह निर्णय केरल के लिए आघात के समान है क्योंकि राज्य लगातार न केवल प्राथमिक कृषि उत्पादों वरन परिष्कृत उत्पादों जैसे काजू गिरी,टायर और नारियल जटा से निर्मित वस्तुओं को अधिकतम संरक्षण देने की मांग करता आ रहा है।

समझौते के कारण केरल का कागज, चाय, मसाले और रबर उद्योग आयातित माल की बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं।

समझौते के प्रभाव में आने के बाद कागज पर लगने वाले 70 प्रतिशत आयात शुल्क में प्रतिवर्ष दो प्रतिशत की कमी की जाएगी।

इसी प्रकार चाय और काफी पर आयात शुल्क जो इस समय 80 प्रतिशत है अगले 10 वर्षो में घटकर 45 प्रतिशत और रबर पर 50 प्रतिशत रह जाएगा।

प्रवासी मामलों के मंत्री व्यालार रवि ने कहा कि इस समझौते से केरल जैसे राज्य का प्रभावित होना सामान्य बात है। उन्होंने कहा,"इन मुद्दों को देखने के लिए एक समिति की नियुक्ति की गई है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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