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मुंबई तट पर 100 वर्षो के दौरान सबसे ऊंची लहरें उठीं (लीड-2)

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ऊंची लहरों के कारण जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

ऊंची लहरों की आशंका के मद्देनजर प्रशासन ने ऐहतियाती कदम उठाते हुए लोगों को पहले ही सचेत कर दिया था और निचले इलाकों में रहने वाले 4,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया था। इन इलाकों के नागरिक अपराह्न् छह बजे, तब अपने-अपने घरों को लौटे जब समुद्र का पानी नीचे उतरना शुरू हुआ।

ऊंची और तीव्र लहरों ने नरीमन पॉइंट, कोलाबा, कफ परेड, मरीन ड्राइव, हाजी अली, वर्ली सीफेस, बांद्रा बैंडस्टैंड, जुहू, वर्सोवा, मर्व, गोराई, भांडुप और विक्रोली में तटबंधों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

ऊंची लहरों के कारण प्रभादेवी, वर्ली, जुहू, बांद्रा, सांताक्रूज और गेटवे ऑफ इंडिया के पास की सड़कों पर पानी भर गया।

थाणे, भायंदर, उत्तन, पालघर, बोईसर व दहाणु जैसे मुंबई के पास के तटीय इलाकों में भी ऊंची लहरें देखी गईं।

वर्ली और कफ परेड की झोपड़पट्टियों और सांताक्रूज में एक इमारत में समुद्र का पानी भर गया और शाम तक धीरे-धीरे पानी वापस समुद्र में उतरा।

मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि लहरों का उठना अपराह्न् 2.05 बजे से शुरू हुआ और शाम 8.09 बजे पानी नीचे उतर गया।

मुंबई में पिछले दो दिनों के दौरान 4.85 और 5.1 मीटर तक ऊंची लहरें उठ चुकी थीं।

वृहन्न मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) ने चेतावनी जारी की थी कि निचले इलाकों के लोग शुक्रवार को उठने वाली लहरों के मद्देनजर पर्याप्त सावधानी बरतें।

गौरतलब है कि गुरुवार को उठीं लहरों के बाद भी कफ परेड, वर्ली, दादर, प्रभादेवी, अंधेरी, जुहू, खार और मलाड की कई इमारतों में पानी घुस गया था। मुंबई की महापौर सुभा राउल के दादर स्थित कार्यालय परिसर की दीवार भी गिर गई थी।

मौसम विभाग ने शनिवार को भी अपराह्न् 2.43 बजे समुद्र में ऊंची लहरें (4.94 मीटर) उठने की चेतावनी दी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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