नेपाली उपराष्ट्रपति का हिंदी में शपथ ग्रहण अवैध करार
काठमांडू, 24 जुलाई (आईएएनएस)। नेपाली सर्वोच्च न्यायालय ने देश के पहले उप राष्ट्रपति परमानंद झा द्वारा हिंदी में ली गई अपने पद की शपथ को शुक्रवार को अवैध करार दिया है। अदालत की ओर से कहा गया कि झा ने हिंदी में शपथ लेकर गलती की है और उन्हें फिर से नेपाली भाषा में शपथ लेनी होगी।
नेपाल के प्रधान न्यायाधीश मिन बहादुर रायामाझी व न्यायमूर्ति बलराम केसी की दो सदस्यीय खंडपीठ द्वारा दिए गए इस फैसले ने नेपाल के दक्षिणी तराई के मैदानों में रहने वाले हिंदीभाषी मधेसी समुदाय को नेपाली भाषी पहाड़ियों के खिलाफ खड़ा कर दिया है।
पूर्व न्यायाधीश परमानंद झा नेपाल में राजशाही की समाप्ति के बाद जुलाई 2008 में देश के पहले उप राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। उन्होंने उस समय हिंदी में शपथ लेकर विवाद खड़ा कर दिया था।
झा ने शपथ ग्रहण के समय धोती और कुर्ता पहन रखा था, जो कि भारतीय पहनावे के रूप में जाना जाता है।
इस घटना के बाद नेपाल में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। माओवादी पार्टी ने झा से इस्तीफे की मांग की थी।
बाद में विरोध प्रदर्शन तो रुक गए, लेकिन एक अति राष्ट्रवादी अधिवक्ता बालकृष्ण नुपाने ने उसी महीने में सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। याचिका में हिंदी के इस्तेमाल को चुनौती दी गई थी और झा से दोबारा नेपाली में शपथ लेने की मांग की गई थी।
अब सर्वोच्च न्यायालय का फैसला ऐसे समय में आया है, जब नेपाली संविधान सभा में मधेसी सांसद दबाव बना रहे हैं कि जब अगले वर्ष नया संविधान बनाया जाए तो उसमें नेपाली के साथ ही हिंदी को देश की दूसरी सरकारी भाषा के रूप में शामिल किया जाए।
लेकिन सरकार में शामिल नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूनीफाइड) तथा नेपाली कांग्रेस जैसी प्रमुख पार्टियां मधेसियों की इस मांग का विरोध कर रही हैं।
अदालत के इस फैसले पर झा ने कहा, "नेपाल का संविधान देश को एक बहुभाषी व बहु-सांस्कृतिक देश के रूप में प्रतिष्ठित करता है। संविधान यह कतई नहीं कहता कि नेपाली नागरिक होने के लिए या किसी उच्च पद के लिए नेपाली भाषा जानना जरूरी है।"
ज्ञात हो कि सभी मधेसी मंत्रियों और सांसदों ने पद की शपथ हिंदी भाषा में ली है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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