नेपाल को भारतीय सैन्य सहायता से शांति समझौते का उल्लंघन : संयुक्त राष्ट्र
काठमांडू, 24 जुलाई (आईएएनएस)। नेपाल को भारतीय सैन्य सहायता की बहाली को लेकर उठे विवाद के मामले में संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को कहा है कि इस तरह का कोई भी कदम पूर्व माओवादी लड़ाकों और सत्ताधारी पार्टियों के बीच हुए उस शांति समझौते का उल्लंघन होगा, जिससे नेपाल में एक दशक पुरानी हिंसा का अंत हुआ था।
यह विवाद मंगलवार को उस समय पैदा हुआ जब नेपाली रक्षा मंत्री विद्या भंडारी ने अपनी सप्ताह भर के भारत दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी से नई दिल्ली में मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने चार वर्ष पूर्व स्थगित की गई सैन्य सहायता और प्रशिक्षण को बहाल करने का आग्रह किया।
नेपाल स्थित संयुक्त राष्ट्र मिशन, जो कि वर्ष 2006 में हुए शांति समझौते के समय से ही माओवादियों और उनके हथियारों की निगरानी कर रहा है, की ओर से कहा गया है, "संयुक्त राष्ट्र नेपाली सेना या माओवादी सेना की किसी भी सैन्य गतिविधि का सख्त विरोध करता है। ऐसी किसी भी गतिविधि से हथियारों और सेनाओं के प्रबंधन की निगरानी के लिए हुए समझौते के अनुच्छेद 5.3 का उल्लंघन होगा।"
इस अनुच्छेद में दर्ज विवरणों के अनुसार सैनिकों की नियुक्ति और सैन्य उपकरणों को जुटाने से शांति समझौते का उल्लंघन होता है।
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन की प्रमुख कारिन लैंडग्रेन ने गुरुवार को जब न्यूयार्क में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस आशय की घोषणा की कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उनके संगठन को छह महीने का अतिरिक्त समय दे दिया है, तो उनसे भारत द्वारा नेपाली सेना को हथियारों की बिक्री बहाल किए जाने की संभावना के बारे में पूछा गया। जवाब में लैंडग्रेन ने कहा कि हथियारों की बिक्री से शांति समझौते का उल्लंघन होगा।
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रवक्ता कॉसमास विश्वकर्मा ने कहा कि भंडारी के भारत प्रस्थान के पहले उन्होंने लैंडग्रेन से एक नियमित मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान लैंडग्रेन ने नेपाली सरकार द्वारा शांति समझौते के उल्लंघन के प्रति चिंता जाहिर की थी।
विश्वकर्मा ने कहा, "उच्चस्तरीय निगरानी समिति से चर्चा किए बगैर नेपाली सेना द्वारा या माओवादियों द्वारा सैनिकों की भर्ती या हथियारों की खरीद या फिर सेना में किसी भी तरह का सुधार कार्य शांति समझौते का उल्लंघन है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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