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भारत का आतंक विरोधी संकल्प पर जोर, एफटीए पर हस्ताक्षर अक्टूबर में (राउंडअप)

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फुकेट (थाईलैंड), 22 जुलाई (आईएएनएस)। दक्षिण एशियाई देशों के संगठन, आसियान के विदेश मंत्रियों तथा पूर्वी एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों की यहां बुधवार को आयोजित बैठक में भारत ने दुनिया को मुंबई हमले और हाल में जकार्ता में हुए बम विस्फोटों की याद दिलाई और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर तथा इस संकट से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के संकल्प को तत्काल अपनाने पर जोर दिया।

भारत की 'पूरब की ओर देखो' नीति पर जोर देते हुए विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने वित्तीय मंदी जैसी वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ एक सामूहिक प्रतिक्रया पर भी जोर दिया। कृष्णा ने कहा कि भारत आसियान के साथ अगले शिखर सम्मेलन में एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीए) समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार है।

कृष्णा ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के 16 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अपनी मुलाकात में कहा, "हमारी आर्थिक राजधानी मुंबई में हुए आतंकी हमले ने न केवल हमारे क्षेत्र को चुनौती दी है, बल्कि इसने पूरी दुनिया के लिए चुनौती खड़ी की है।"

कृष्णा सोमवार देर रात तीन दिन की यात्रा पर यहां पहुंचे थे। उन्होंने ईएएस देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अनौपचारिक बातचीत में भारत की पूर्वी एशियाई क्षेत्र के साथ व्यापक आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों की इच्छा बताई।

थाईलैंड अक्टूबर में आसियान और ईएएस की शिखर बैठकों की मेजबानी करेगा। आयोजन स्थल तय किया जाना अभी बाकी है। भारत आसियान का सहयोगी वार्ताकार है। आसियान देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और ब्रुनेई शामिल हैं।

10 सदस्यीय आसियान देशों के अलावा 16 सदस्यीय ईएएस में भारत, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया भी है।

कृष्णा गुरुवार को 16वीं आसियान क्षेत्रीय मंच (आरएएफ)की बैठक में हिस्सा लेंगे। सुरक्षा मामलों पर होने वाली इस बैठक में आतंकवाद, उत्तर कोरियाई परमाणु मसले और वैश्विक वित्तीय संकट पर चर्चा होगी। आरएएफ में अमेरिका, चीन और पाकिस्तान सहित 27 देशों के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे।

कृष्णा ने चीन के विदेश मंत्री यांग जेइची से थाईलैंड के फुकेट द्वीप में पहली बार मुलाकात की और जोर दिया कि भारत और चीन शत्रु नहीं बल्कि उभरते हुए एशिया में सहयोगी हैं।

भारत-आसियान की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान यांग से 20 मिनट की वार्ता के बाद कृष्णा ने भारतीय पत्रकारों से कहा, "भारत और चीन आर्थिक और व्यापार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं लेकिन वे शत्रु नहीं हैं। भारत और चीन दोनों को विकास करने के लिए पर्याप्त स्थान है।"

चीनी खतरे के बारे में अटकलों को खारिज करते हुए कृष्णा ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र में स्थायी मित्रता और साझेदारी कायम करने की भारत की इच्छा से यांग को अवगत करा दिया।

यांग ने कृष्णा से कहा कि बीजिंग इस वर्ष के अंत में होने वाली राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की चीन यात्रा का इंतजार कर रहा है।

सीमा विवाद और हाल ही में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से भारत को मिलने वाले एक कर्ज पर चीन के विरोध से उपजे विवाद के बावजूद दोनों विदेशमंत्रियों ने आर्थिक संबंधों में विस्तार पर संतोष जताया।

उल्लेखनीय है कि चीन ने हाल ही में एडीबी से भारत को मिलने वाले एक कर्ज का इसलिए विरोध किया क्योंकि उसमें अरुणाचल प्रदेश के लिए भी आवंटन शामिल था। चीन अरुणाचल प्रदेश को अपनी सीमा में होने का दावा करता है।

कृष्णा ने बुधवार को श्रीलंकाई विदेश मंत्री रोहिता बोगलागामा से भी करीब आधे घंटे तक बातचीत की। बातचीत में 30 शरणार्थी शिविरों में रह रहे तमिलों के पुनर्वास के मसले पर मुख्य रूप से चर्चा हुई।

श्रीलंका ने नई दिल्ली को यह भरोसा दिलाया कि वह सत्ता में भागीदारी के जरिए तमिल अल्पसंख्यकों की भावनाओं का कद्र करने के लिए एक राजनीतिक समाधान निकालने हेतु बचनबद्ध है।

बातचीत के बाद बोगलागामा ने भारतीय पत्रकारों को बताया, "सत्ता की भागीदारी संविधान का हिस्सा है और उसका क्रियान्वयन प्रक्रिया का अंग है। हमने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।"

बोगलागामा ने कृष्णा को तमिलों के पुनर्वास और सत्ता की भागीदारी के लिए राजनयिक सर्वसम्मति बनाने की प्रक्रिया की दिशा में अपनी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

कृष्णा ने कहा कि श्रीलंका सरकार से 300,000 तमिलों के पुनर्वास को तत्काल प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "श्रीलंका ने हमें भरोसा दिलाया है कि 180 दिन के भीतर वह ज्यादातर तमिलों का पुनर्वास कर देगी।" भारत ने तमिलों के पुनर्वास में श्रीलंका सरकार को सहायता देने की पेशकश की है।

सम्मेलन के दौरान कृष्णा की बुधवार को रूसी विदेश मंत्री सग्रेइ लेवरोव से भी मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान रूस ने तालिबान और उसके अन्य सहयोगी इस्लामी आतंकवादियों के बढ़ते क्षेत्रीय खतरे से निपटने के लिए भारत से रक्षा सहयोग मांगा।

दोनों मंत्रियों ने अपनी मुलाकात के दौरान आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने के साथ ही असैन्य परमाणु ऊर्जा, रक्षा और व्यापार जैसे द्विपक्षीय क्षेत्रों पर चर्चा की।

थाईलैंड में आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन) के क्षेत्रीय फोरम के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने आए कृष्णा की लेवरोव से यह पहली मुलाकात थी।

पिछले कुछ महीनों से रूस अफगानिस्तान के मामले में सक्रिय हुआ है। ताजिकिस्तान सीमा पर 16 जुलाई को एक सैन्य जांच चौकी पर पांच आतंकवादियों के मारे जाने के बाद से इसमें विशेष तेजी आई है।

इस घटना ने मध्य एशिया में एक इस्लामी आतंकवादी तंत्र का भय पैदा कर दिया है, जिससे रूस के हितों को खतरा है।

तालिबान और उसके सहयोगी संगठनों के दमन के कारण आतंकवादियों के भागने की घटनाओं में हो रही वृद्धि को देखते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, रूस के राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव और ताजिक राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन 28 जुलाई को दुशाम्बे में मुलाकात करेंगे और आतंकवाद के दमन तथा व्यापार वृद्धि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की योजना पर चर्चा करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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