सूर्यग्रहण : मौसम की बेरुखी से नहीं उठा पाए खगोलीय नजारे का लुत्फ (राउंडअप)
उधर सूर्यग्रहण के बाद पारंपरिक स्नान के लिए वाराणसी में गंगा नदी और कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर समेत विभिन्न स्थानों की पवित्र नदियों में लाखों लोगों ने डुबकी लगाई। वाराणसी में सूर्यग्रहण देखने और उसके बाद स्नान के लिए पवित्र गंगा नदी के तट पर जमा हुई हजारों की भीड़ में एक व्यक्ति की कुचलने से मौत हो गई जबकि एक अन्य की डूबने से मौत हो गई।
वाराणसी के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पी. सी. मीणा ने बताया, "एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई और दूसरा भगदड़ के दौरान मारा गया। मारे गए दोनों व्यक्तियों की शिनाख्त अभी तक नहीं हो सकी है।"
गुजरात में बुधवार सुबह घने बादल छा जाने की वजह पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं देखा जा सका। अहमदाबाद से सूरत पहुंचे 'गुजराज साइंस सिटी' के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सूरत में सुबह के समय 6.25 बजे से 6.27 के बीच कुछ अंधकार महसूस किया गया लेकिन घने बादल की वजह से पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं दिखा।"
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी सूर्यग्रहण देखने सूरत पहुंचने वाले थे, लेकिन पूर्ण सूर्यग्रहण दिखने की संभावना बेहद कम होने की खबर मिलने पर उन्होंने अपना यह प्रस्तावित दौरा सुबह पांच बजे रद्द कर दिया।
बिहार में रोहतास जिले के सासाराम में बुधवार तड़के सैकड़ों की तादाद में लोग विभिन्न स्थानों पर जमा हुए। सुबह में 6.23 बजे जैसे सूर्यग्रहण का मनोरम दृश्य दिखा लोगों की आंखें आसमान की ओर टिकी रह गईं।
इस सूर्यग्रहण को देखने के लिए दिल्ली से 28 लोगों का एक विशेष दल सासाराम पहुंचा था। इसी दल के एक सदस्य और 'नेहरू तारा मंडल' के खगोलविद् रघु कालरा ने कहा, "यहां मौसम साफ होने की वजह से पूर्ण सूर्यग्रहण देखा गया। यह काफी रोचक था और इसे हमने अपने कैमरों में कैद कर लिया। इस पर अध्ययन करेंगे और विभिन्न जगहों पर इन तस्वीरों का प्रदर्शन भी करेंगे।"
उधर, बिहार के ही तारेगना में सूर्यग्रहण देखने के लिए देश तथा विदेश के खगोलविदों तथा वैज्ञानिकों सहित करीब 40,000 लोग तारेगना पहुंचे थे। परंतु बादल घिर जाने की वजह से पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं देखा जा सका। पिछले दो दिनों से पटना तथा तारेगना में डेरा जमाए दिल्ली के स्पेस सेंटर के वैज्ञानिक विक्रांत मंडल ने बुधवार को कहा कि बादल रहने के कारण वैज्ञानिकों को निराशा हुई।
असम में सुबह दिन चढ़ने के बाद करीब तीन मिनट तक अंधेरा छा गया। सुबह 6.28 बजे सूर्यग्रहण की वजह से असम के ज्यादातर हिस्सों में अंधेरा छा गया। आर. बर्मन नाम के एक वैज्ञानिक ने बताया, "यह सपने जैसा था..तीन मिनट से ज्यादा देर के लिए दिन के रात में तब्दील होने की यह अद्भुत घटना थी जिसे सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है।"
गुवाहाटी और राज्य के कई हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण का बेहतरीन दृश्य देखने को मिला। लोगों ने यहां हीरे की अंगूठी का आकार बनने का अद्भुत नजारा भी देखा।
सूचना तकनीक का बड़ा केंद्र के रूप में विख्यात बंगलुरू में भी इस सूर्यग्रहण को लेकर खासी उत्सुकता थी। शहर के लालबाग वनस्पति उद्यान में 200 की संख्या में वैज्ञानिक, शोधकर्ता और आम लोग सुबह 5.30 बजे एकत्रित हो गए थे।
कई जगहों पर लोगों ने सूर्यग्रहण के मौके पर धार्मिक पूजा-पाठ और स्नान किया। हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित पवित्र 'ब्रह्मसरोवर' तालाब में स्नान के लिए भारी संख्या में लोग जमा हुए।
प्रशासन ने बताया कि लगभग 15 लाख लोगों के यहां पहुंचने की उम्मीद थी। लोगों ने तड़के तीन बजे से ही ब्रह्मसरोवर में स्नान शुरू कर दिया था। हिदू धर्म में कुरुक्षेत्र को खासा पवित्र स्थान माना जाता है क्योंकि यहीं महाभारत का युद्ध हुआ था।
मिराज ने सबसे करीब से देखा सूर्यग्रहण!
मौसम की बेरूखी के चलते भले ही देश के साथ मध्य प्रदेश के कई हिस्सों के लोग इस सदी के सबसे बड़े सूर्यग्रहण को न देख पाए हों मगर ग्वालियर स्थित वायुसेना के एयरबेस से उड़ान भरने वाले मिराज-2000 ने सूर्यग्रहण को 42 हजार फुट की ऊंचाई पर पहुंचकर सबसे करीब से देखा।
भारतीय वायुसेना ने सूर्यग्रहण के घटनाक्रम को करीब से देखने के लिए दो विमानों को आकाश में उड़ाया था। एक विमान एएन 32 ने आगरा से उड़ान भरी थी तो दूसरे जहाज मिराज-2000 ने ग्वालियर एयरबेस से आकाश का रुख किया था। मिराज-2000 में स्वचालित कैमरे लगे थे जिनसे सूर्यग्रहण की बदलती स्थिति को कैद किया गया।
वायुसेना के दिल्ली स्थित मुख्यालय के जनसंपर्क अधिकारी टी़ क़े सिंघा ने आईएएनएस को बताया है कि एएन 32 सिर्फ 25 हजार फुट की ऊंचाई तक ही गया जबकि मिराज 2000 ने 42 हजार फुट की ऊंचाई पर पहुंचकर सूर्यग्रहण की तस्वीरों को कैमरे में कैद किया। मिराज 2000 लगभग सवा घंटे आकाश में रहा और उसने सूर्यग्रहण के नजारे को करीब से देखा।
सिंघा ने बताया कि वायुसेना के जो दो विमान सूर्यग्रहण को देखने के लिए आकाश में उड़े थे उनमें मिराज 2000 की ऊंचाई सबसे ज्यादा थी। इसके अलावा भी अन्य कई जहाज आकाश में उड़े थे। ये जहाज कितनी ऊंचाई तक गए इसकी जानकारी होने से सिंघा ने इंकार कर दिया।
विस्मयकारी था 41,000 फुट की ऊंचाई से सूर्यग्रहण देखना!
दीपक भिमानी (70) उन 35 यात्रियों में शामिल थे, जिन्होंने एक विशेष विमान में सवार होकर धरती से 41,000 फुट की ऊंचाई से सदी के सबसे लंबे समय तक रहने वाले पूर्ण सूर्यग्रहण का अवलोकन किया। जीवन के इस अद्भुत उड़ान से नीचे उतरने के बाद भिमानी ने कहा, "यह एक विस्मयकारी अनुभव था।"
विमान पर सवार यात्रियों में सबसे उम्रदराज रहे भिमानी ने आईएएनएस को बताया, "यह बहुत ही रोमांचक था और उसकी व्याख्या करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। ऐसा लगता था जैसे सूर्य मेरे बिल्कुल करीब है और हमने सूर्य की एक बिल्कुल वास्तविक छवि का दीदार किया। यहां तक कि आसमान में अंधेरा छाने के साथ ही हम बुध व शुक्र ग्रह को भी देख सकते थे और यह पूरी प्रक्रिया विस्मयकारी थी।"
इसके पहले भिमानी अंटार्कटिका और सहारा से भी सूर्यग्रहण देख चुके हैं।
यह विशेष उड़ान इकलिप्स चेजर्स एथेनीयम (ईसीए) के मार्गदर्शन में कॉक्स एंड किंग्स इंडिया नामक एक ट्रैवेल एजेंसी की ओर से आयोजित की गई थी। ईसीए युवकों में विज्ञान व खगोल शास्त्र को लोकप्रिय बनाने के लिए काम करने वाली एक संस्था, साइंस पॉपुलराइजेशन एसोसिएशन ऑफ कम्युनिकेटर्स एंड एजुकेटर्स (एसपीएसीई) की एक शाखा है।
यह अनुभव बहुतों के लिए यादगार बन गया। विमान ने बुधवार तड़के ठीक 4.30 बजे दिल्ली से उड़ान भरा और सुबह 6.20 से 6.25 के बीच बिहार में गया के ऊपर आसमान में जमीन से लगभग 41,000 फुट की ऊंचाई पर तीन मिनट तक चक्कर लगाया। कुछ यात्रियों ने विमान में खिड़की के पास वाली सीट के लिए 70,000 रुपये तक अदा किए थे।
एक अन्य यात्री विजत असार ने कहा, "यह अद्भुत था और मैं विभिन्न ऊंचाइयों से और विभिन्न चरणों में सूर्यग्रहण को देख पाने में सक्षम था। यह एक यादगार अनुभव है। मैंने पहली बार इस तरह से सूर्यग्रहण देखा है।"
देश के विभिन्न हिस्सों में बुधवार को लाखों लोगों ने सदी के इस सबसे लंबे समय तक रहने वाले सूर्यग्रहण का अवलोकन किया। लेकिन कुछ हिस्सों में आसमान में छाए बादलों ने लोगों को निराश भी किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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