मध्य प्रदेश में जूनियर चिकित्सकों की हड़ताल पर सरकार नरम पड़ी
प्रदेश के 1500 जूनियर चिकित्सक हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल गुरुवार को भी जारी रही। प्रदेश के पांच चिकित्सा महाविद्यालयों के अस्पतालों में इस हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह लड़खड़ा चुकी है। सरकार के सख्त रूख के चलते इन हड़ताली चिकित्सकों में से लगभग 1100 को निष्कासित किया जा चुका है। इतना ही नहीं स्वास्थ्य सेवाओं को अत्यावश्यक घोषित किए जाने के बावजूद जूनियर चिकित्सक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
प्रदेश सरकार के रूख में गुरुवार को कुछ नरमी आई और स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा ने चिकित्सा महाविद्यालयों को प्रमुखों को निर्देश दिए कि जो छात्र काम पर लौटते है उनका निष्कासन रद्द कर दिया जाए। मिश्रा ने यह निर्देश तब दिए जब कुछ छात्रों ने उनसे मिलकर काम पर लौटने की इच्छा जताई।
सरकार की ओर से दावा किया गया है कि जूनियर चिकित्सकों की हड़ताल के बावजूद चिकित्सा महाविद्यालयों के अस्पतालों में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही है। हड़ताल के चौथे दिन 4000 मरीज इन अस्पतालों में पहुंचे, जिनमें से 375 को भर्ती किया गया।
जूनियर चिकित्सकों की इस हड़ताल का कांग्रेस ने समर्थन किया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता क़े क़े मिश्रा का कहना है कि सरकार जूनियर चिकित्सकों की न्यायोचित मांगों को नजरअंदाज कर तानाशाहीपूर्ण रवैया अपना रही है। सरकार के इस रवैये के कारण मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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