संयुक्त वक्तव्य कूटनीतिक पर्चा है, कानूनी दस्तावेज नहीं : थरूर
नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने कहा है कि हाल में जारी भारत और पाकिस्तान का संयुक्त वक्तव्य कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि कूटनीतिक पर्चा है और "कागज पर लिखे शब्द नहीं बल्कि भविष्य की आतंकवादी गतिविधियों को रोकने में पाकिस्तान का व्यवहार ज्यादा मायने रखेगा।"
संसद भवन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में थरूर ने कहा, "यह प्रेस को जारी किया गया कूटनीतिक पर्चा है, कोई कानूनी दस्तावेज नहीं। आखिर बात सिर्फ कागज पर लिखे अल्फाज की नहीं, बल्कि सरकार के बर्ताव की भी है।"
यह वक्तव्य मिस्र के शर्म अल-शेख में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बीच वार्ता के बाद जारी किया गया था।
थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने साझा बयान में वार्ता के बारे में अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट किया। "हमने कहा है कि भारत पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता तब तक नहीं करेगा जब तक हमें पूर्ण आश्वासन नहीं मिलता और पाकिस्तान की ओर से विश्वसनीय कार्रवाई नहीं हो जातीं।"
उन्होंने कहा, "सिर्फ बयान की भाषा ही नीति निर्धारण नहीं करती।"
थरूर ने कहा, " लोगों के लिए यह कहना आसान है कि कागज के टुकड़े पर चंद शब्द लिखकर भारत के हितों के साथ समझौता किया गया है जबकि यह कोई कानूनी दस्तावेज न होकर महज कूटनीतिक पर्चा है जो प्रेस को जारी किया गया। यह पर्चा कानूनी दस्तावेज से भिन्न है।"
उन्होंने पाकिस्तानी मीडिया में जारी इन खबरों के बारे में अनभिज्ञता व्यक्त की कि गिलानी ने मनमोहन सिंह को विध्वंसकारी गतिविधियों में भारत के शामिल होने से जुड़े सबूतों के बारे में कोई दस्तावेज सौंपा है।
उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा कोई दस्तावेज नहीं देखा है। यदि ऐसा कोई दस्तावेज है भी तो मुझे पक्का यकीन है कि मेरे मंत्रालय के योग्य सहयोगी उसका गहन अध्ययन कर रहे होंगे और अध्ययन के बाद उसका उचित उत्तर दिया जाएगा।"
पाकिस्तानी मीडिया में सरकारी सूत्रों के हवाले से श्रीलंकाई टीम और लाहौर के बाहर पुलिस अकादमी पर हमले के पीछे भारत का हाथ होने के संबंध में लगाए गए आरोपों पर थरूर ने कहा, "किसी भी निष्क्रिय देश में हो रही गतिविधियों की जिम्मेदारी स्वस्थ परंपराओं में यकीन रखने वाले पड़ोसी देशों पर डालने में हम यकीन नहीं करते।"
उन्होंने कहा भारत पड़ोसी देशों को नुकसान पहुंचाकर अपना फायदा नहीं चाहता। उन्होंने कहा, "हम स्थिर, समृद्ध पाकिस्तान चाहते हैं। हमारा पाकिस्तान को अस्थिर करने का कोई इरादा नहीं। पड़ोसियों को अस्थिर करने की नीति किसी और की रही है, हमारी नहीं।"
थरूर के साथ विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने भी संयुक्त वक्तव्य में बलूचिस्तान के उल्लेख का बचाव किया। उन्होंने संवाददाताओं से चर्चा में कहा, "सिर्फ इस बात का जिक्र किया गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कुछ चिंता व्यक्त की और प्रधानमंत्री ने कहा इसे हल करने में उन्हें कोई समस्या नहीं है क्योंकि हम खुाली किताब की तरह हैं और हम वहां यकीनन कुछ नहीं कर रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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