अंतिम उपयोगकर्ता करार से भारत परमाणु अप्रसार की मुख्यधारा में आया : अमेरिका
वाशिंगटन, 23 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की भारत यात्रा के दौरान हुए अंतिम उपयोगकर्ता निगरानी करार (एंड यूजर मॉनिटरिंग अरेंजमेंट) को 'ऐतिहासिक घटनाक्रम' करार देते हुए अमेरिका ने कहा है कि इस करार ने भारत को परमाणु अप्रसार की मुख्यधारा में ला दिया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता राबर्ट वुड से गुरुवार को जब संवाददाताओं ने पूछा कि उच्च तकनीक वाले रक्षा उपकरणो और प्रौद्योगिकी के लिए अंतिम उपयोगकर्ता निगरानी करार कैसे प्रभावी होगा तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, "यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण समझौता है।"
उन्होंने कहा, "हमें गर्व है और हम यह मानते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच का यह करार वैश्विक अप्रसार के हमारे प्रयासों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हमारा मानना है कि इस करार ने भारत को परमणु अप्रसार की मुख्यधारा में ला दिया है। इसलिए यह एक ऐतिहासिक घटना है।"
उन्होंने कहा, "अंतिम उपयोगकर्ता का बुनियादी मतलब यह सुनिश्चित करना है कि एक बार जो भी साजो-सामान भारत को दे दिया गया, वह किसी तीसरी पार्टी को तब तक नहीं दिया जाना चाहिए जब तक कि इस संबंध में अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं हो।"
भारत में इस करार को लेकर उठ रहे विरोधी स्वरों के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "भारत ने होशो हवास में इस समझौते पर हस्ताक्षर का फैसला किया है। भारत ने खुद कहा है कि यह उसके हित में है।"
उन्होंने कहा, "हम निश्चित तौर पर यह सोचते हैं कि यह करार अमेरिका के हित में है। लेकिन साथ ही हम यह भी मानते हैं कि कुल मिलाकर यह एक अच्छा करार है। हमें इस करार को क्रियान्वित करने की आवश्यकता है और इसकी प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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