मानवाधिकार: सऊदी अरब की निंदा

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सऊदी अरब की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि उसने आतंक-विरोधी कार्यक्रम के तहत कथित रुप से दुर्व्यवहार किया. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी एक नई रिपोर्ट में कहा है कि सन् 2001 से सऊदी अरब में हज़ारों सऊदी नागरिकों को बिना मुक़दमें और किसी आरोप के हिरासत में ले लिया गया.
एमनेस्टी का कहना है कि इस पर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चुप्पी साधी हुई है.एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है की साउदी अरब का मानवाधिकार रिकॉर्ड बहुत ही चौंकाने वाला है.
अपनी 69 पन्नों की रिपोर्ट, 'सऊदी अरेबिया-असॉल्टिंग ह्यूमन राइट्स इन दी नेम ऑफ़ काउंटर टेर्रोरिस्म', में एमनेस्टी ने आरोप लगाया है कि साउदी अरब में मानवाधिकार हनन व्यापक और बड़े पैमाने पर फैला हुआ है.
सऊदी प्रशासन को अल-क़ायदा को देश में परास्त करने का श्रेय दिया जाता है. लेकिन एमनेस्टी का कहना है हजारों लोग जो यहाँ बिना मुक़दमे के हिरासत में हैं उन पर ऐसे संगठनों से जुड़े होने के आरोप हैं जो पश्चिमी नागरिकों आदि पर हमले के लिए जिम्मेदार हैं.
एमनेस्टी का कहना है कि इन मामलों को बहुत गोपनीय रखा जाता है.एमनेस्टी ने कई उदाहरणों के ज़रिये कहा है कि इन मामलों में मानवाधिकारों के औसत मापदंडो को भी पूरा नहीं किया गया.
एमनेस्टी के ब्रिटेन में निदेशक केट एलन का कहना कुछ पुराने जेहादियों की पुनर्शिक्षा के कार्यक्रम और समन्वयित सार्वजनिक सुनवाई के अलावा आमतौर पर सुरक्षा संबंधी मामलों में यहां अत्यधिक गोपनियता बरती जाती है. उन्होने कहा, "हम चाहते है कि सऊदी अधिकारी नीतिगत बदलाव करे."


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