सूर्यग्रहण : मौसम की बेरुखी ने किया मायूस (लीड-1)
गुजरात में बुधवार सुबह घने बादल छा जाने की वजह पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं देखा जा सका। अहमदाबाद से सूरत पहुंचे 'गुजराज साइंस सिटी' के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सूरत में सुबह के समय 6.25 बजे से 6.27 के बीच कुछ अंधकार महसूस किया गया लेकिन घने बादल की वजह से पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं दिखा।"
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी सूर्यग्रहण देखने सूरत पहुंचने वाले थे, लेकिन पूर्ण सूर्यग्रहण दिखने की संभावना बेहद कम होने की खबर मिलने पर उन्होंने अपना यह प्रस्तावित दौरा सुबह पांच बजे रद्द कर दिया।
बिहार में रोहतास जिले के सासाराम में बुधवार तड़के सैकड़ों की तादाद में लोग विभिन्न स्थानों पर जमा हुए। सुबह में 6.23 बजे जैसे सूर्यग्रहण का मनोरम दृश्य दिखा लोगों की आंखें आसमान की ओर टिकी रह गईं।
इस सूर्यग्रहण को देखने के लिए दिल्ली से 28 लोगों का एक विशेष दल सासाराम पहुंचा था। इसी दल के एक सदस्य और 'नेहरू तारा मंडल' के खगोलविद् रघु कालरा ने कहा, "यहां मौसम साफ होने की वजह से पूर्ण सूर्यग्रहण देखा गया। यह काफी रोचक था और इसे हमने अपने कैमरों में कैद कर लिया। इस पर अध्ययन करेंगे और विभिन्न जगहों पर इन तस्वीरों का प्रदर्शन भी करेंगे।"
उधर, तारेगना में सूर्यग्रहण देखने के लिए देश तथा विदेश के खगोलविदों तथा वैज्ञानिकों सहित करीब 40,000 लोग तारेगना पहुंचे थे। परंतु बादल घिर जाने की वजह से पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं देखा जा सका। पिछले दो दिनों से पटना तथा तारेगना में डेरा जमाए दिल्ली के स्पेस सेंटर के वैज्ञानिक विक्रांत मंडल ने बुधवार को कहा कि बादल रहने के कारण वैज्ञानिकों को निराशा हुई।
असम में सुबह दिन चढ़ने के बाद करीब तीन मिनट तक अंधेरा छा गया। सुबह 6.28 बजे सूर्यग्रहण की वजह से असम के ज्यादातर हिस्सों में अंधेरा छा गया। आर. बर्मन नाम के एक वैज्ञानिक ने बताया, "यह सपने जैसा था..तीन मिनट से ज्यादा देर के लिए दिन के रात में तब्दील होने की यह अद्भुत घटना थी जिसे सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है।"
गुवाहाटी और राज्य के कई हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण का बेहतरीन दृश्य देखने को मिला। लोगों ने यहां हीरे की अंगूठी का आकार बनने का अद्भुत नजारा भी देखा।
सूचना तकनीक का बड़ा केंद्र के रूप में विख्यात बंगलुरू में भी इस सूर्यग्रहण को लेकर खासी उत्सुकता थी। शहर के लालबाग वनस्पति उद्यान में 200 की संख्या में वैज्ञानिक, शोधकर्ता और आम लोग सुबह 5.30 बजे एकत्रित हो गए थे।
कई जगहों पर लोगों ने सूर्यग्रहण के मौके पर धार्मिक पूजा-पाठ और स्नान किया। हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित पवित्र 'ब्रह्मसरोवर' तालाब में स्नान के लिए भारी संख्या में लोग जमा हुए।
प्रशासन ने बताया कि लगभग 15 लाख लोगों के यहां पहुंचने की उम्मीद थी। लोगों ने तड़के तीन बजे से ही ब्रह्मसरोवर में स्नान शुरू कर दिया था। हिदू धर्म में कुरुक्षेत्र को खासा पवित्र स्थान माना जाता है क्योंकि यहीं महाभारत का युद्ध हुआ था।
दूसरी ओर सूर्यग्रहण के दौरान वाराणसी में दो लोगों की जान चली गई। सूर्यग्रहण देखने के लिए पवित्र गंगा नदी के तट पर जमा हुई हजारों की भीड़ में एक व्यक्ति की कुचलने से मौत हो गई जबकि एक अन्य की डूबने से मौत हो गई।
विदेश में भी सूर्यग्रहण को लेकर लोगों में काफी दलचस्पी दिखी। ताइवान में लोगों ने छतों पर चढ़कर इस नजारे को देखा। हालांकि यहां कुछ जगहों पर इसे देखा जा सका। चीन, जापान, तिब्बत और कई अन्य देशों में भी सूर्यग्रहण को देखने के लिए हजारों लोग अपने घरों से बाहर निकले।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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