मुझे फांसी पर लटका दीजिए : कसाब (लीड-1)
विशेष न्यायाधीश एम.एल.ताहिलयानी की अदालत में कसाब द्वारा शुरू किए गए बयान का यह दूसरा दिन था, जब उसने अपने गुनाहों के लिए फांसी पर लटकाए जाने की अपील की।
कसाब ने कहा कि उसने इस धरती पर गुनाह किया है और उसे इस धरती के लोगों द्वारा दंडित किया जाना चाहिए।
कसाब ने कहा कि वह अपना गुनाह कबूल कर मामले को हल्की सजा की ओर नहीं मोड़ रहा है। उसने कहा, "मैं खुदा के हाथों सजा नहीं चाहता। मेरे अपराधों के लिए मुझे फांसी पर लटका दीजिए।"
कसाब ने यह अनुरोध उस समय किया, जब विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम उसके इकबालिया बयान पर अपनी दलील दे रहे थे। निकम ने इसे एक नाटक करार दिया।
निकम ने दलील दी कि कसाब ने मुंबई पर हुए हमलों की पूरी साजिश से पर्दा नहीं उठाया है। वह पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं को बचाने की कोशिश कर रहा है।
निकम ने कहा कि अन्य साजिशकर्ताओं के नाम गिनाकर वह यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह 26 नवंबर के मुंबई आंतकी हमलों के मास्टरमाइंड के हाथों की कठपुतली भर है।
निकम ने कहा कि उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि वह बचाव पक्ष के वकील एस.जी. अब्बास काजमी से पूछे कि क्या कसाब को अपने इकबालिया बयान के नतीजों की जानकारी है या नहीं।
निकम ने संवाददाताओं को बताया कि काजमी ने दलील दी है कि कसाब को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। लेकिन ताहिलयानी द्वारा इस बारे में पूछे जाने पर कसाब ने इससे साफ इंकार किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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