विस्मयकारी था 41,000 फुट की ऊंचाई से सूर्यग्रहण देखना!
विमान पर सवार यात्रियों में सबसे उम्रदराज रहे भिमानी ने आईएएनएस को बताया, "यह बहुत ही रोमांचक था और उसकी व्याख्या करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। ऐसा लगता था जैसे सूर्य मेरे बिल्कुल करीब है और हमने सूर्य की एक बिल्कुल वास्तविक छवि का दीदार किया। यहां तक कि आसमान में अंधेरा छाने के साथ ही हम बुध व शुक्र ग्रह को भी देख सकते थे और यह पूरी प्रक्रिया विस्मयकारी थी।"
इसके पहले भिमानी अंटार्कटिका और सहारा से भी सूर्यग्रहण देख चुके हैं।
यह विशेष उड़ान इकलिप्स चेजर्स एथेनीयम (ईसीए) के मार्गदर्शन में कॉक्स एंड किंग्स इंडिया नामक एक ट्रैवेल एजेंसी की ओर से आयोजित की गई थी। ईसीए युवकों में विज्ञान व खगोल शास्त्र को लोकप्रिय बनाने के लिए काम करने वाली एक संस्था, साइंस पॉपुलराइजेशन एसोसिएशन ऑफ कम्युनिकेटर्स एंड एजुकेटर्स (एसपीएसीई) की एक शाखा है।
यह अनुभव बहुतों के लिए यादगार बन गया। विमान ने बुधवार तड़के ठीक 4.30 बजे दिल्ली से उड़ान भरा और सुबह 6.20 से 6.25 के बीच बिहार में गया के ऊपर आसमान में जमीन से लगभग 41,000 फुट की ऊंचाई पर तीन मिनट तक चक्कर लगाया। कुछ यात्रियों ने विमान में खिड़की के पास वाली सीट के लिए 70,000 रुपये तक अदा किए थे।
एक अन्य यात्री विजत असार ने कहा, "यह अद्भुत था और मैं विभिन्न ऊंचाइयों से और विभिन्न चरणों में सूर्यग्रहण को देख पाने में सक्षम था। यह एक यादगार अनुभव है। मैंने पहली बार इस तरह से सूर्यग्रहण देखा है।"
देश के विभिन्न हिस्सों में बुधवार को लाखों लोगों ने सदी के इस सबसे लंबे समय तक रहने वाले सूर्यग्रहण का अवलोकन किया। लेकिन कुछ हिस्सों में आसमान में छाए बादलों ने लोगों को निराश भी किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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