मप्र में 50 फीसदी गर्भवती महिलाएं पूरक पोषण आहार से वंचित
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर वर्ष 2001 में पूरक पोषण आहार कार्यक्रम में चिन्हित हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार प्रदान किया जाना था।
नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि वर्ष 2007- 08 के दौरान प्रदेश में 37 से 48 प्रतिशत तक गर्भवती महिलाएं और 40 से 53 प्रतिशत तक बच्चे पूरक पोषण आहार से वंचित रहे। प्रशासनिक अमले द्वारा इसकी मुख्य वजह जिलों को समय से राशि जारी न किया जाना बताया जा रहा है।
इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और राज्य सरकारों के आदेशों में यह भी प्रावधान है कि हर माह पूरक पोषण आहार कम से कम 21 दिन हितग्राही को दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी केन्द्रों से 21 दिन पूरक पोषण आहार नहीं दिया गया है।
सीएजी की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि महिला बाल विकास विभाग द्वारा मध्य प्रदेश में बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं को चिकित्सा एवं शिक्षा किट उपलब्ध कराने में भी हीला हवाली की गई है। यही वजह है कि वर्ष 2006 से 2008 के दौरान लगभग 23 करोड़ रुपए उपलब्ध होने के बावजूद संचालनालय आंगनबाड़ी केन्द्रों को किट उपलब्ध नहीं करा पाया।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बच्चों और महिलाओं के लिए शुरू की गई स्थानीय खाद्य पद्यार्थ योजना (लोकल फूड माडल स्कीम) के क्रियान्वयन में भी अनियमितताएं हुई हैं। निर्धारित मापदंडों का ठीक तरह से पालन नहीं किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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