राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार की नीयत पर विपक्ष ने उठाए सवाल

गृह मंत्रालय की वर्ष 2009-10 के लिए अनुदान मांगों पर लोकसभा में चल रही चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा की सुषमा स्वराज ने कहा, "राष्ट्रपति के अभिभाषण में जिन प्रतिबद्धताओं का जिक्र किया गया था, उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 10 प्राथमिकताओं की बात कही गई थी लेकिन खेद का विषय है कि गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों में इनमें से केवल तीन का ही जिक्र है। यह राष्ट्रपति के अभिभाषण की अवहेलना है।"

उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति के अभिभाषण में आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की बात कही गई थी, लेकिन सरकार ने पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता में आंतकवाद के मुद्दे को हटा दिया। संसद पर हमले के दोषी को अभी तक फांसी की सजा नहीं दी गई। कुछ राज्य आतंकवाद विरोधी कानूनों को कड़ा बनाने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति मांग रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार उन्हें अनुमति नहीं दे रही है। जम्मू एवं कश्मीर से सेना की वापसी का निर्णय कर लिया जाता है। ऐसे में इस सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा की क्या उम्मीद की जा सकती है।"

समाजवादी पार्टी (सपा) के मुलायम सिंह यादव ने कहा, "नक्सली समस्या से आज देश को सबसे बड़ा आंतरिक खतरा पैदा हो गया है लेकिन सरकार इसके मूल कारणों के निवारण से डर रही है। गरीबी और बेरोजगारी इसका मुख्य कारण है लेकिन सरकार इस दिशा में इसके हल के लिए कोई प्रयास ही नहीं कर रही है।"

उन्होंने कहा, "लाठी, डंडा और गोली से इस समस्या का हल नहीं निकलेगा। नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास होने चाहिए।"

जनता दल (युनाइटेड) के मोनाजिर हसन ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा आज गंभीर खतरे में है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सभी दलों को एकजुट होकर इसका समाधान निकालना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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