भरतपुर पक्षी विहार में सूखा, नहीं गूंजेगा पक्षियों का कलरव
भरतपुर (राजस्थान), 22 जुलाई (आईएएनएस)। भरतपुर में स्थित केवलादेव पक्षी विहार में आजकल पक्षियों को देखने और उनके कलरव का आनंद लेने वालों की संख्या कम ही देखने को मिलती है। इसकी प्रमुख वजह पक्षी विहार में पानी कम होने के कारण पक्षियों की संख्या में कमी आना है। इन दिनों पक्षी विहार के बाहर स्थित होटल लगभग खाली हैं।
बारिश न होने और तालाबों में पानी सूख जाने की वजह से हालात यह है कि मेढ़क और कछुए भी गायब हो गए हैं। सूखे की वजह से माना जा रहा है कि जाड़े के मौसम में बड़ी तादाद में आने वाले प्रवासी पक्षी शायद ही इधर का रुख करें। ऐसे में दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों की संख्या पर भी असर पड़ेगा और स्वाभाविक रूप से पर्यटन उद्योग प्रभावित होगा।
पिछले साल मानसून के दौरान क्षेत्र में 800 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी लेकिन इस साल अभी तक मात्र 96 मिमी बारिश हुई है।
पक्षी विहार के नजदीक स्थित होटल के मालिक वी. बंसल ने आईएएनएस को बताया कि पक्षी विहार को तत्काल पानी की जरूरत है अन्यथा पक्षी यहां नहीं आएंगे। होटल प्रताप पैलेस के गिरीश ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून भरतपुर पर मेहरबान होगा।
पक्षी विहार के प्रभारी अनूप के.आर. ने आईएएनएस को बताया कि हालात चिंताजनक हैं। हमारे पास यहां मौजूद पक्षियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए सात ट्यूब वेल हैं। हालांकि प्राकृतिक पानी जरूरी है। उनके अनुसार पक्षी विहार में मौजूदा समय में ओपेनबिल स्टार्क, इग्रेट्स, ग्रे हेरोन, ब्लैक नेक्ड स्टार्क और स्नेक बर्डस घोसला बनाए हुए हैं।
पक्षी विहार आए पक्षी प्रेमी कुशल का कहना है कि ओपेनबिल स्टार्क कई सालों के बाद पक्षी विहार लौट आईं और यहां बड़ी संख्या में हैं। लेकिन डर इस बात का है कि अगर यहां पानी नहीं होगा तो ये कहीं और चली जाएंगी।
पक्षी विहार के चौकीदार और वाचमैन ने कहा कि जमीन में पानी न होने के कारण मेढ़क और कछुए गायब हो गए हैं। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में बारिश होने से ये फिर वापस आ सकते हैं।
पक्षी प्रेमी के.पी. सिंह ने आईएएनएस को बताया कि पक्षी विहार में पानी लाने के लिए लगभग आधा दर्जन परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं लेकिन इनमें से किसी पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि पक्षी विहार में पानी यमुना या चंबल नदी से लाना होगा। नजदीक स्थित पंचना और अजान बांध इतने बड़े पक्षी विहार की पानी की जरूरत को पूरा नहीं कर सकते। पक्षियों के पोषण के लिए ज्यादा पानी की जरूरत है।
राजस्थान सरकार यमुना नहर से पाइपलाइन के माध्यम से नियमित आपूर्ति की व्यवस्था करने के लिए एक परियोजना पर काम कर रही है।
के.पी. सिंह ने इस पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि जब दिल्ली में यमुना नदी में ही बहुत थोड़ा पानी है तो ऐसे में हम भरतपुर तक पानी कैसे ला पाएंगे।
एक और समस्या हरियाली न होने की है। जंगल विभाग ने विलायती बबूल लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एक अधिकारी का कहना है कि मानूसन आने में हुई देरी के कारण छोटे पौधे सूख गए हैं।
दो साल पहले यूनेस्को ने केवलादेव को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची से हटाने की चेतावनी दी थी। उस समय यहां के तालाबों में पानी नहीं था। अगर बारिश नहीं हुई तो ऐसा फिर हो सकता है।
पानी न मिलने के कारण उस समय पक्षी आगरा के नजदीक कीथम चले गए थे और पक्षियों को देखने आने वाले पर्यटकों ने भरतपुर आना बंद कर दिया था। लेकिन अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार हालात वैसे नहीं होंगे।
भरतपुर को 10 मार्च, 1982 को राष्ट्रीय पार्क घोषित किया गया था। दिसंबर 1985 में इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में स्वीकार किया गया था।
पूरे साल में जाड़े का मौसम विदेशी पक्षियों को देखने के लिए सबसे अच्छा होता है। प्रवासी पक्षी फरवरी के आखिर या मार्च के शुरुआती दिनों में जब पारा चढ़ने लगता है तब यहां से विदा लेने लगते हैं।
सर्दियों में भरतपुर पक्षी विहार में आने वाले लोग पक्षियों की लगभग 300 प्रजातियों को देख सकते हैं। लुप्तप्राय साइबेरियन क्रेन को भी यहां देखा जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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