भारत, चीन शत्रु नहीं वरन सहयोगी : कृष्णा
मनीष चांद
फुकेट (थाईलैंड), 22 जुलाई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने चीन के विदेश मंत्री यांग जेइची से थाईलैंड के फुकेट द्वीप में पहली बार मुलाकात की और जोर दिया कि भारत और चीन शत्रु नहीं बल्कि उभरते हुए एशिया में सहयोगी हैं।
भारत-आसियान की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान यांग से 20 मिनट की वार्ता के बाद कृष्णा ने भारतीय पत्रकारों से कहा,"भारत और चीन आर्थिक और व्यापार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं लेकिन वे शत्रु नहीं हैं। भारत और चीन दोनों को विकास करने के लिए पर्याप्त स्थान है।"
यांग के साथ मुलाकात को "बहुत उपयोगी, सौहार्दपूर्ण और मित्रतापूर्ण" बताते हुए कृष्णा ने कहा,"हमने भारत और चीन के बहुपक्षीय सहयोग को और गहरा बनाने की साझा इच्छा व्यक्त की।"
चीनी खतरे के बारे में अटकलों को खारिज करते हुए कृष्णा ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र में स्थाई मित्रता और साझेदारी कायम करने की भारत की इच्छा से यांग को अवगत करा दिया।
कृष्णा ने कहा कि इस संक्षिप्त मुलाकात का उद्देश्य दोनों के बीच की आपसी समझ और मेलजोल कायम करना था। उन्होंने कहा कि यांग की सहजता और गर्मजोशी ने उन्हें प्रभावित किया।
यांग ने कृष्णा से कहा कि बीजिंग इस वर्ष के अंत में होने वाली राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की चीन यात्रा का इंतजार कर रहा है।
सीमा विवाद और हाल ही में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से भारत को मिलने वाले एक कर्ज पर चीन के विरोध से उपजे विवाद के बावजूद दोनों विदेशमंत्रियों ने आर्थिक संबंधों में विस्तार पर संतोष जताया।
भारत और चीन के द्विपक्षीय व्यापार के वर्ष 2010 तक 60 अरब डॉलर के पार हो जाने की आशा है।
उल्लेखनीय है कि चीन ने हाल ही में एडीबी से भारत को मिलने वाले एक कर्ज का इसलिए विरोध किया क्योंकि उसमें अरुणाचल प्रदेश के लिए भी आवंटन शामिल था। चीन अरुणाचल प्रदेश को अपनी सीमा में होने का दावा करता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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