एमपी: जूनियर डाक्‍टरों की हड़ताल, मरीज बेहाल

Hospital in MP
भोपाल। मध्य प्रदेश में जारी जूनियर चिकित्सकों की हड़ताल में सरकार और हड़तालियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। जहां चिकित्सा महाविद्यालय सरकार के निर्देश पर 1078 जूनियर चिकित्सकों को निष्कासित करने का फैसला कर चुके हैं, वहीं जूनियर चिकित्सक अपनी मांगों के पूरा हुए बिना काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं।

सरकार और जूनियर चिकित्सकों के इस टकराव ने मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकार की ओर से किए गए वैकल्पिक इंतजाम भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।

एसमा लागू करने की घोषणा

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा ने स्वास्थ्य सेवाओं को अत्यावश्यक घोषित करने के साथ 'आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून' (एस्मा) लागू करने की घोषणा की है। विभागीय अधिकारियों को वैकल्पिक इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार जूनियर चिकित्सकों की हड़ताल खत्म हुए बिना उनसे किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं है।

उधर, जूनियर चिकित्सक एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कृष्णकान्त प्रजापति ने आईएएनएस से कहा है कि वे अब भी अपने रुख पर कायम हैं और सरकार से बातचीत करने को भी तैयार है।

1500 डाक्‍टर हड़ताल पर

मध्य प्रदेश के पांच चिकित्सा महाविद्यालयों के 1500 जूनियर चिकित्सक सोमवार से अपनी मांगों को लेकर बेमियादी हड़ताल पर हैं। जूनियर चिकित्सक भत्ता बढ़ाने, फीस में कटौती, चिकित्सा महाविद्यालयों में भारतीय चिकित्सा परिषद के मापदंडों के मुताबिक सुविधाएं और अस्पतालों में जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

इस हड़ताल से पांचों चिकित्सा महाविद्यालयों के अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह लड़खड़ा गई हैं और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज अस्पताल में आकर बिना इलाज के लौट रहे हैं, वहीं भर्ती मरीज अस्पताल को छोड़कर निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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