अब महिलाएं करेंगी सरहदों की रखवाली

बीएसएफ के अधिकारियों ने बताया कि 180 युवा महिलाओं का प्रशिक्षण खारखान शिविर में चल रहा है और शीघ्र ही इन्हें पंजाब की भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात किया जाएगा। कुछ महिलाओं को बाद में भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात किया जाएगा।
महिलाओं को सभी सीमा चौकियों पर तैनात करने के लिए बीएसएफ अधिकारी उनके लिए अलग आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण करा रहे हैं।
गृहमंत्री पी.चिदंबरम इस सप्ताह महिलाओं की पहली पासिंग आउट परेड की सलामी लेंगे। इनमें पश्चिम बंगाल की 45 महिलाएं हैं और शेष पंजाब की हैं।
महिलाओं की नियुक्ति से सबसे अधिक खुश सीमावर्ती गांवों के लोग हैं जो अपने खेतों में काम करने के लिए कांटेदार तारों की बाड़ के पार जाते हैं। ये तार अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 500 मीटर से एक किलोमीटर भीतर हैं।
खानगढ़ सीमा चौकी के समीप रहने वाले किसान गुरदेव सिंह ने कहा, "इससे हमारी महिलाओं को आसानी होगी। तारों की बाड़ के उस पार अपने खेतों में काम करने के लिए महिलाओं को जाने में काफी मुश्किल होती है । अब महिला बीएसएफ कर्मचारियों की उपस्थिति में खेत में काम करने वाली महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा।"
पंजाब सीमा पर 1990 के दशक में लगने वाली कांटेदार तारों की बाड़ के पार खेतों में काम करने जाने पर होने वाली तलाशी के कारण महिलाओं ने उस पर जाना बंद कर दिया था।
भारत ने आतंकवादियों की घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए बाड़ लगाई थी। किसानों को केवल सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक बाड़ के पार अपने खेतों में काम करने जाने की अनुमति है। इसके लिए भी कड़ी तलाशी देनी पड़ती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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