मुंबई में कहर बरपाने आया था कसाब

26 नवंबर को हुए मुंबई हमलों में अपनी भूमिका स्वीकारते हुए कसाब ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) हमले का ब्यौरा दिया। उसने बताया कि उन्हें हिदायत मिली थी कि सबसे पहले लोगों को गोलियों से भूनना शुरू करो, फिर बंधक बनाओ और फिर बंधकों को बचाने की कोशिश करने वालों को मार गिराओ।
हमलों के सिलसिले में जारी मुकदमे की सुनवाई में कसाब की स्वीकारोक्ति से नाटकीय मोड़ आ गया है। उसने स्वीकार किया है कि वह पाकिस्तानी है और अदालत को विस्तार से बताया है कि वह और उसके नौ साथी मुंबई पर कहर बरपाने आए थे। उसके सभी साथी सुरक्षा बलों की 60 घंटे तक चली कार्रवाई में मारे गए थे।
इन हमलों में 180 लोग मारे गए थे और 300 से ज्यादा घायल हो गए थे। कसाब ने हमले में अपनी भूमिका कबूलने के साथ ही अदालत में अपने पाकिस्तानी साथियों के नाम भी बताए। उसने बताया कि कराची से रवाना होते समय अबु हमजा, अबु जिंदाल, अबु काफा और जकी-उर-रहमान लखवी उन्हें जहाज तक छोड़ने आए थे।
विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने कसाब के इकबालिया बयान को (सच्चाई और अभियोजन पक्ष की जीत) बताया, जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने इस मामले में मृत्युदंड सुनाने का अनुरोध किया।
विशेष न्यायाधीश एम.एल. ताहिलयानी ने मुकदमे की सुनवाई कल तक स्थगित करते हुए मीडिया को बयान के कुछ खास अंश जारी नहीं करने का आदेश दिया है।


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