कसाब ने इकबालिया बयान में जुर्म कबूला (राउंडअप)
कसाब ने सोमवार को विशेष अदालत में कबूल किया कि वह एक पाकिस्तानी नागरिक है। अब तक वह इस तथ्य से इंकार करता रहा था।
कसाब ने इकबालिया बयान में उस जघन्य घटनाक्रम का ब्योरा दिया जिसकी परिणति देश पर हुए सबसे घातक आतंकवादी हमले के रूप में हुई थी और जिसमें 180 लोग मारे गए थे।
अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की भारत यात्रा के दौरान कसाब द्वारा जुर्म कबूलने से आतंकवाद के मसले पर भारत के पक्ष को बल मिलेगा।
कसाब द्वारा अचानक की गई इस स्वीकारोक्ति से अदालत में मौजूद लोग हैरान रह गए। कसाब ने विशेष न्यायाधीश ताहिलयानी को संबोधित करते हुए उर्दू में अपनी बात कहनी शुरू की। उसने कहा, "मैं अदालत में इकाबलिया बयान देना चाहता हूं। मैं खुद पर लगे आरोपों को स्वीकार करता हूं।"
कसाब ने अपने बयान में छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) और कामा अस्पताल पर हमलों में अपनी भूमिका का विस्तार से ब्योरा दिया।
कसाब ने हमले में अपनी भूमिका कबूलने के साथ ही पाकिस्तानी साथियों के नाम भी बताए। उसने बताया कि कराची से रवाना होते समय अबु हमजा, अबु जिंदाल, अबु काफा और जकी-उर-रहमान लखवी उन्हें जहाज तक छोड़ने आए थे। भारतीय अधिकारी बेंगलुरू के भारतीय विज्ञान संस्थान में दिसंबर 2005 में आतंकी हमले के पीछे हमजा का हाथ मानते हैं।
कसाब ने इस बात का भी ब्योरा दिया कि कैसे उसने एक टैक्सी में बम रखा था, जिससे बाद में दक्षिणी मुंबई के मझगांव में धमाका हो गया था।
मुंबई हमलों के पीछे लखवी को मास्टरमाइंड बताते हुए कसाब ने विस्तार से बताया कि कैसे उसने और उसके साथी अबु इस्माइल ने सीएसटी के सार्वजनिक शौचालय में बाद में इस्तेमाल के लिए टाइमर युक्त बम तैयार किया था। इस्माइल पुलिस के हाथों मारा गया था।
उसने आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे और उनके सहयोगी विजय सालस्कर के साथ कामा अस्पताल में हुई मुठभेड़ का ब्योरा भी दिया और बताया कि उसने कैसे उन्हें मार डाला।
उसने बताया कि इसी दौरान उसने और उसके साथी इस्माइल ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक काम्टे को मार डाला और पुलिस की एक जीप अगवाकर वे गिरगांव चौपाटी की ओर बढ़ गए।
उसने बताया कि कराची से मुंबई तक की यात्रा अरब सागर में विभिन्न रास्तों से चार अलग-अलग नौकाओं में पूरी हुई। कसाब और उसके साथी 26 नंवबर को मुंबई पहुंचे और आखिर में टैक्सियों में सवार होकर विभिन्न दिशाओं में जघन्य आतंकवादी हमले को अंजाम देने के लिए निकल पड़े।
पूरे बयान के दौरान कसाब अपने आकाओं और सहयोगी इस्माइल का नाम लेता रहा। जिन्होंने 10 आतंकवादियों के दल को हिदायतें, नक्शे, हथियार और साजोसामान मुहैया कराया।
कसाब की स्वीकारोक्ति पुलिस की जीत : चव्हाण
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने सोमवार को कहा कि मुंबई आतंकी हमले में पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब द्वारा भूमिका कबूल किया जाना 'पुलिस और अभियोजन पक्ष की जीत' है।
चव्हाण ने कहा कि कसाब के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में इस मामले की गहन जांच करने के लिए विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम और मुंबई पुलिस तथा अपराध शाखा के प्रयासों की भी सराहना की।
पिछले महीने विशेष अदालत ने इस मामले के 35 आरोपियों में से 27 के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। इस मामले में मुंबई पुलिस ने 11,500 पृष्ठों का आरोप पत्र दाखिल किया है। इसमें कई व्यक्तियों के अलावा जकी-उर-रहमान लखवी का नाम भी शामिल है, जिसे कसाब ने मुंबई हमले का मास्टरमाइंड बताया है।
आखिरकार सच सामने आ ही गया : उज्वल निकम
मुंबई हमले में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के सोमवार को अपना जुर्म कबूल कर लेने के बाद विशेष लोक अभियोजक उज्वल निकम ने कहा कि आखिरकार सच सामने आया।
निकम ने संवादाताओं से कहा, " यह सच और अभियोजन पक्ष की जीत है। कसाब न केवल खतरनाक आतंकवादी है बल्कि वह अच्छा अभिनेता भी है।"
निकम ने कहा कि सच सामने आ चुका है। अब इसे आधार बनाकर वह कसाब को अधिकतम सजा दिलाने की कोशिश करेंगे।
उन्होंने कहा कि कसाब ने कई अवसरों पर अदालत का समय नष्ट करने की कोशिश की। पहले उसने खुद को नाबालिग बताया जबकि चिकित्सकीय जांच में उसकी सही उम्र 20 वर्ष के करीब आई।
इसके बाद उसने खुद के पाकिस्तानी नागरिक होने से इंकार किया जो कि अदालत की सुनवाई के दौरान गलत साबित हुआ। इसके अलावा कई अन्य अवसरों पर कसाब ने बीमारी आदि का बहाना बनाकर अदालत का समय नष्ट करने की कोशिश की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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