सूर्यग्रहण देखने के लिए पूरा देश तैयार (लीड-1)
यह पूर्ण सूर्यग्रहण गुजरात के सूरत में सूर्योदय के साथ शुरू होगा और छह मिनट 44 सेकंड में समाप्त हो जाएगा।
इस पूर्ण सूर्यग्रहण ने बिहार के मसौढ़ी अनुमंडल के तारेगना को सूर्खियों में ला दिया है। सूर्यग्रहण यहां सबसे लंबे समय तक देखा जा सकेगा। सूर्यग्रहण का नजारा देखने और इसका अध्ययन करने के लिए देश-विदेश के खगोलविदों तथा वैज्ञानिकों का यहां पहुंचने का सिलसिला जारी है। प्रशासन ने यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। सूर्यग्रहण को देखने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अन्य हस्तियां भी तारेगना पहुंचेंगी।
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आऱ मल्लार विज्जी ने मंगलवार को बताया कि चार स्तरीय सुरक्षा घेरे में पटना जिले में आने-जाने वालों की जांच की जा रही है, जबकि मसौढ़ी अनुमंडल की सुरक्षा के लिए 18 से अधिक प्रशासनिक अधिकारियों को तैनात किया गया है।
वैज्ञानिक तारेगना में नवनिर्मित अस्पताल भवन की छत से सूर्यग्रहण देखेंगे।
पटना के गांधी मैदान में भी सूर्यग्रहण देखने की विशेष व्यवस्था की गई है। गांधी मैदान में एक बड़े पर्दे पर छिद्र कर सोलर फिल्टर लगाए जा रहे हैं। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रो़ सच्चिदानंद के मुताबिक 150 छिद्र बनाए जाने की योजना है ताकि एक साथ 150 व्यक्ति इस अद्भुत नजारे का आनंद ले सकें।
पटना तारामंडल के निदेशक अमिताभ घोष के मुताबिक कोलकाता के बिड़ला तारामंडल के रिसर्च एंड एजुकेशन के निदेशक भी अपनी टीम के साथ पटना आएंगे। उन्होंने बताया कि तारेगना में सूर्यग्रहण देखने के लिए पोलैंड की एक टीम भी पहुंच चुकी है। इसके अलावा नैनीताल के आर्यभट्ट शोध संस्थान तथा दिल्ली के स्पेस सेंटर से वैज्ञानिकों का दल पटना पहुंच चुका है।
ज्ञात हो कि वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्यग्रहण के भू मध्य रेखा पर होने के कारण तारेगना से सूर्यग्रहण अधिक समय तक दिखेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार 22 जुलाई को सूर्योदय 5़11 बजे होगा। सूर्यग्रहण लगभग साढ़े पांच बजे सुबह से शुरू होकर 6़ 25 तक रहेगा। पटना और तारेगना में इसे तीन मिनट 47 सेकेंड तक बेहतर ढंग से देखा जा सकता है।
दिल्ली में 85 प्रतिशत सूर्यग्रहण दिखाई देगा। 12वीं के एक छात्र राहुल ने कहा, "मैं इस पूर्ण सूर्यग्रहण को देखने के लिए बहुत उत्सुक हूं। मैंने इसके लिए नेहरू तारामंडल से एक सौर चश्मा खरीदा है।"
दिल्ली स्थित नेहरू तारामंडल की निदेशक एन.रत्नाश्री ने कहा, "दिल्ली के लोग सूर्यग्रहण को पूर्णरूप में नहीं देख पाएंगे। दिल्ली में सबसे अधिक ग्रहण सुबह 6.25 बजे होगा। उस समय सूर्य का 85 प्रतिशत हिस्सा ग्रहण में होगा।"
लेकिन दिल्ली में मंगलवार को दोपहर में हुई हल्की बारिश से सूर्यग्रहण देखने को लेकर उत्सुक लोगों में निराशा फैल गई कि कहीं बुधवार को भी मौसम कुछ ऐसा ही न रहे।
सफदरजंग मौसम कार्यालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि अगले 24 घंटे में राजधानी में बारिश हो सकती है।
उत्तर प्रदेश मौसम विभाग ने भी कहा है कि अगले 48 घंटों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और गरज के साथ रिमझ्झिम बारिश होगी, जिससे दुर्लभ ग्रहण को देखने में कठिनाई हो सकती है।
प्रदेश मौसम विभाग के निदेशक जे.पी.गुप्ता ने आईएएनएस को बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुअा है, जिसके कारण प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बादल छाए रहेंगे।
लखनऊ में सूर्यग्रहण सुबह साढ़े पांच बजे शुरू होगा। 111 साल बाद होने जा रही इस दुर्लभ खगोलीय घटना को लोगों को दिखाने के लिए लखनऊ के आंचलिक विज्ञान केंद्र और इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में विशेष इंतजाम किए गए हैं।
अलीगंज स्थित आंचलिक विज्ञान केंद्र सुबह पांच बजे खुल जाएगा। यहां पर इस अनोखे सूर्यग्रहण का सजीव प्रसारण किया जाएगा। सूर्यग्रहण की तस्वीरें टेलीस्कोप से लेकर पर्दे पर दिखाई जाएंगी। इसके अलावा लोगों के लिए सोलर चश्मों की व्यवस्था भी की गई है।
भोपाल स्थित मौसम विभाग ने भी कहा है कि प्रदेश में बुधवार सुबह आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। प्रदेश के क्षेत्रीय मौसम केंद्र के निदेशक डी.पी.दुबे ने कहा कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बने रहने के कारण अधिकतर हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। इस कारण सूर्यग्रहण देखने वालों को निराश होना पड़ सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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