कसाब ने किया मुंबई हमले के पीछे की मंशा का खुलासा (लीड-1)

विशेष न्यायाधीश एम.एल. ताहिलयानी ने मुकदमे की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित करते हुए मीडिया को बयान के कुछ खास अंश जारी नहीं करने का आदेश दिया। ताहिलयानी ने यह आदेश उस समय दिया जब कसाब ने मुंबई हमलों के पीछे की मंशाओं का खुलासा किया।

न्यायाधीश ने मीडिया को कसाब द्वारा बताए गए हमले के उद्देश्यों की रिपोर्टिग नहीं करने का आदेश दिया क्योंकि इससे देश में सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है।

सोमवार को अपना जुर्म स्वीकार कर सबको हैरत में डालने वाले कसाब ने मंगलवार को बताया कि उन्हें हिदायत मिली थी कि सबसे पहले लोगों को गोलियों से भूनना शुरू करो, फिर बंधक बनाओ और फिर बंधकों को बचाने की कोशिश करने वालों को मार गिराओ।

हमलों के सिलसिले में जारी मुकदमे की सुनवाई में कसाब की स्वीकारोक्ति से नाटकीय मोड़ आ गया है। उसने स्वीकार किया है कि वह पाकिस्तानी है। उसने अदालत को विस्तार से बताया कि वह और उसके नौ साथी मुंबई पर कहर बरपाने आए थे। उसके सभी साथी सुरक्षा बलों की 60 घंटे तक चली कार्रवाई में मारे गए थे। इन हमलों में 180 लोग मारे गए थे और 300 से ज्यादा घायल हो गए थे।

कसाब ने हमले में अपनी भूमिका कबूलने के साथ ही अदालत में अपने पाकिस्तानी साथियों के नाम भी बताए। उसने बताया कि कराची से रवाना होते समय अबु हमजा, अबु जिंदाल, अबु काफा और जकी-उर-रहमान लखवी उन्हें जहाज तक छोड़ने आए थे।

विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने कसाब के इकबालिया बयान को , ' सच्चाई और अभियोजन पक्ष की जीत' बताया, जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने इस मामले में मृत्युदंड सुनाने का अनुरोध किया।

उधर, सरकार द्वारा नियुक्त कसाब के वकील एस.जी.अब्बास काजमी ने मंगलवार को कहा कि विशेष अदालत में कसाब की स्वीकारोक्ति उसका इकबालिया बयान नहीं है।

अदालत की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित होने के बाद अदालत के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में काजमी ने कहा कि कसाब की स्वीकारोक्ति विशेष न्यायाधीश के उस सवाल के जवाब में सामने आई जिसमें उन्होंने पूछा था कि वह खुद को दोषी क्यों ठहराना चाहता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस कसाब को 'मानसिक यातनाएं' दे रही है। काजमी के मुताबिक कसाब ने कहा कि ड्यूटी अफसर ने उसे सूचित किया है कि पाकिस्तान ने किस तरह यह स्वीकार किया कि कसाब पाकिस्तानी नागरिक है और इस मामले में पाकिस्तान में मुकदमे चलाए जाएंगे।

काजमी ने कहा कि अबु जुंदाल नामक भारतीय सूत्र के बारे में कसाब के खुलासे की सुरक्षा एजेंसियों और अभियोजन के द्वारा गंभीरता से जांच किए जाने की जरूरत है।

इस पर विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने बचाव पक्ष के वकील का विरोध करते हुए कहा कि यह मामले की सुनवाई में देर किए जाने की चाल है।

निकम ने कहा, "पिछले तीन महीने में हमने 135 गवाहों को अदालत में पेश किया है और हम चाहते हैं कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी हो।"

निकम ने कहा कि कसाब की स्वीकारोक्ति पर वह पुलिस अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे कि क्या उसने हमले के संबंध में सभी विवरणों का खुलासा कर दिया है। क्या उसका अपराध साबित होता है और यह भी कि उसके लिए किस तरह की सजा की मांग की जाए।

निकम ने कहा, "पुलिस अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद बुधवार को अदालत के सामने हम अपनी बहस को आगे बढ़ाएंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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