गंगूबाई हंगल के निधन पर सांस्कृतिक हलकों में शोक की लहर
हृदय व श्वांस की समस्यों से जूझ रहीं गंगूबाई हंगल (96) का बेंगलुरू से 480 किलोमीटर दूर हुबली कस्बे में मंगलवार को सुबह सात बजे निधन हो गया।
हंगल के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए प्रख्यात साहित्यकार यू.आर. अनंतमूर्ति ने आईएएनएस से कहा, "गंगूबाई हंगल किराना घराने से संबद्ध थीं और वह एक विशिष्ट गायिका थीं। उनकी गरिमा और उनका आकर्षण नायाब था। उनकी सिर्फ आवाज ही सुरीली नहीं थी, बल्कि शास्त्रीय संगीत की बारीकियों पर भी उनकी अद्भुत पकड़ थी।"
चर्चित नाटककार और अभिनेता गिरीश कर्नाड ने कहा कि हंगल ने छह दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलोदिमाग पर अपना जादू कायम रखा।
कर्नाड ने कहा, "वह एक माहिर कलाकार थीं और अपनी प्रतिभा के लिए हमेशा याद की जाती रहेंगी। कर्नाटक और पूरी दुनिया का कला समाज उन्हें और उनकी गायन शैली को हमेशा याद करता रहेगा।"
हंगल के पारिवारिक सूत्रों ने कहा कि वह पिछले एक महीने से बीमार थीं और उन्हें गुरुवार को हुबली के लाइफलाइन इमर्जेसी केयर सेंटर में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के समय उनके तीनों बेटों और दो बेटियों सहित परिवार के करीबी सदस्य उनके पास मौजूद थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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