पिछले एक वर्ष में रैगिंग के 88 मामलों में 12 मरे
एक स्वयंसेवी संस्था 'कोएलिशन टू अपरूट रैगिंग फ्राम एजुकेशन' (सीयूआरई) के अनुसार जुलाई 2008 से जून 2009 के बीच रैगिंग के 88 मामले दर्ज किए गए, इनमें 12 छात्रों की मौत हुई और रैगिंग के कारण पांच छात्रों ने आत्महत्या का प्रयास किया।
इससे एक वर्ष पहले कुल 89 मामले दर्ज किए गए। इनमें मरने वालों की संख्या 11 थी और पांच ने आत्महत्या का प्रयास किया था।
सीयूआरई के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने आईएएनएस से कहा कि इससे स्पष्ट है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अन्य नियामक संस्थाओं के दावों के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।
रैगिंग से सबसे अधिक प्रभावित राज्य आंध्र प्रदेश है। यहां 12 मामले सामने आए हैं, जिनमें चार में छात्रों की मौत हुई। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में रैगिंग के 10-10 मामले सामने आए।
हिमाचल प्रदेश में कुल छह मामले सामने आए, जिनमें दो छात्रों की मौत हुई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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