समलैंगिकता पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से एलजीबीटी समुदाय में खुशी
उच्च न्यायालय के फैसले को धार्मिक नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन आदेश देने से इंकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से भारतीय दंड संहिता की विवादास्पद धारा 377 की समीक्षा करने के लिए कहा है। यह धारा समलैंगिकता पर रोक लगाती है। अदालत ने सरकार से इस मामले में छह सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट जमा करने के लिए भी कहा।
महान्यायवादी जी.ई.वाहनवती ने अदालत में कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन आदेश की कोईआवश्यकता नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के साथ ही एलजीबीटी समुदाय के लोग इंद्रधनुषी झंडों, बैनरों और पोस्टरों के साथ सड़कों पर उतर आए। समलैंगिकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही अभिनेत्री सेलिना जेटली कहा, "यह लड़ाई तो अभी शुरू ही हुई है।"
जेटली ने कहा, "तमाम सारे कानूनों को फिर से तैयार किया जाना है और उन्हें बदलना है, क्योंकि तमाम समुदायों के लोग अंधेरे में जीवन जी रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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