मंत्री के खिलाफ न्यायाधीश के आरोप पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), वामपंथी दलों, एआईएडीएमके और जनता दल (युनाइटेड) के करीब 200 सांसदों ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि इस मामले में वह जांच का आदेश दें। सांसदों ने कहा कि अंकपत्र धोखाधड़ी के इस मामले में न्यायाधीश ने खुली अदालत में कहा कि केंद्रीय मंत्री ने उन्हें फोन किया था।
दोनों सदनों के सांसद इस मसले पर मनमोहन सिंह को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपेंगे। मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर. रघुपति ने 30 जून को एक अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए यह कहा था कि एक केंद्रीय मंत्री ने फोन कर उनसे कहा कि दोनों आरोपी को जमानत दे दें।
यह अग्रिम जमानत याचिका पुडुचेरी में स्थित एक निजी मेडिकल कालेज के छात्र एस. किरुबा श्रीधर और उसके पिता सी. कृष्णमूर्ति की ओर से दाखिल की गई थी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद ए. संपत ने कहा, "कई राजनीतिक दल अभी अपने सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया में हैं। हमने पत्र पर पहले ही हस्ताक्षर कर दिया है। उम्मीद है कि एक या दो दिन में इसे प्रधानमंत्री को सौंप दिया जाएगा।"
न्यायाधीश ने चेतावनी दी थी कि वे इस मामले की शिकायत केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से करेंगे, हालांकि अब तक उन्होंने मंत्री का नाम जाहिर नहीं किया है।
एआईएडीएमके प्रमुख और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने आरोप लगाया था कि वह मंत्री और कोई नहीं बल्कि सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री ए. राजा हैं।
ज्ञापन में सांसदों ने कहा, "रिपोर्ट के अनुसार न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया कि मंत्री ने उन्हें खुद फोन नहीं किया बल्कि आरोपियों का वकील उनके कक्ष में आया और कहा कि केंद्रीय मंत्री आपसे बात करना चाहते हैं और उसने बातचीत के लिए फोन नंबर मिला दिया। "
ज्ञापन में कहा गया है, "अगर इस स्पष्टीकरण को सही मान भी लिया जाए तो भी मंत्री के द्वारा यह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास का मामला है। और अगर वकील मंत्री के नाम पर झांसा दे रहा था तो फिर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। कुल मिलाकर इस मामले में सच्चाई पर से पर्दा हटना चाहिए।"
सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ सांसद अरुण जेटली, बृंदा करात और सीताराम येचुरी इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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